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आज जो भी हूं अपनी शिक्षा की वजह सेः प्रधानमंत्री

आज जो भी हूं अपनी शिक्षा की वजह सेः प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बाल दिवस के अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वह भी देश के एक आम आदमी हैं और उन्हें यह सर्वोच्च पद उनकी शिक्षा की वजह से प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा, मैं एक आम आदमी हूं। अगर मैं प्रधानमंत्री बन सकता हूं, तो आप भी इस पद पर आ सकते हैं। मैं एक बहुत साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आया हूं। मैं आज जो भी हूं, वह अपनी शिक्षा की वजह से ही हूं।

सीएनएन-आईबीएन ने बाल दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री के आवास पर बच्चों के एक समूह के साथ उनकी परिचर्चा का आयोजन किया था। बच्चों से बातचीत के दौरान मनमोहन सिंह ने कहा, मैं समझता हूं कि शिक्षा ने मेरे इस पद पर पहुंचने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम में मनमोहन से पूछा गया था कि वह एक आम आदमी से प्रधानमंत्री कैसे बन गए। विपक्ष द्वारा उनको कमजोर प्रधानमंत्री बताए जाने संबंधी प्रश्न पर उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे लगता है कि अगर मैं सही काम कर रहा हूं, तो मेरी अंतरआत्मा इसकी गवाही देगी। आलोचना करना विपक्ष का काम है। मुझे इसकी कोई चिंता नहीं।

बच्चों के इस कार्यक्रम में सहज दिखाई दे रहे 77 वर्षीय मनमोहन के साथ उनकी पत्नी गुरशरण कौर भी मौजूद थीं। इस कार्यक्रम में बच्चों ने प्रधानमंत्री से कुछ हल्के फुलके सवालों समेत देश में बढ़ती माओवादी हिंसा, गठबंधन सरकार, दसवीं के बोर्ड खत्म करने का प्रयास, गरीब छात्रों की शिक्षा से दूरी जैसे गंभीर प्रश्न भी पूछे।

अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए मनमोहन ने कहा कि एक बार जब उनके घर कुछ मेहमान आए थे, तब उनके पिता ने एक घड़ी और कुछ रुपये चुराने के संदेह में उनकी पिटाई की थी।

इस लम्हे को याद करते हुए उन्होंने कहा, मेरे पिता ने मुझे मारा, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि ऐसा करने वाला कोई और था। उसके बाद उन्होंने इस सजा पर अफसोस भी जताया था।

हमेशा नीली पगड़ी पहनने के बारे में पूछे जाने पर मनमोहन ने कहा, मुझे बचपन से ही नीला रंग पसंद है। मैं चार पांच साल पहले तक विभिन्न रंगों की पगड़ी पहनता था, लेकिन अब मैं सिर्फ नीले रंग की पगड़ी ही पहनता हूं।

एक बच्चे द्वारा प्रधानमंत्री से संगीत में रुचि होने के सवाल पर उन्होंने बताया कि उन्हें संगीत से गहरा लगाव है। उन्होंने कहा, मेरी पत्नी बहुत अच्छी गायिका हैं। जब हम युवा थे, तब वो मुझे गुरबानी सुनाती थीं। इसके अलावा मुझे ग़ज़ल, खासतौर पर मिर्जा ग़ालिब का कलाम बहुत पसंद है।

एक बच्चे ने उनसे सवाल किया कि क्या उनका ऑरकुट, फेसबुक या ई-मेल अकाउंट है और उन्हें यह जानकर बहुत हैरत हुई कि आज के साइबर युग में प्रधानमंत्री के पास इस तरह का कोई अकाउंट नहीं है। इसपर मनमोहन ने कहा, मेरे पास इनमें से कोई अकाउंट नहीं है, लेकिन मैं क्या कर रहा हूं इसकी जानकारी मेरी वेबसाइट पर उपलब्ध होती है।

एक बच्चे के सवाल पर प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्हें सूजी का हलवा बहुत पसंद है। वहीं एक छात्र ने उनसे पूछा कि ऐसा क्यों हैं कि एक भारतीय द्वारा देश छोड़ने के बाद ही उसको नोबेल पुरस्कार मिल पाता है इसपर उन्होंने कहा, हमारे यहां ऐसा वातावरण ही नहीं है कि यहां अलग सोचने वाले को महत्व दिया जाए। उन्होंने कहा कि चीजों के बारे में सवाल पूछने की प्रवृत्ति शिक्षा प्रणाली का अंग नहीं है।

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