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दो टूक (शुक्रवार, 14 नवंबर 2009)

इसी शहर में वह कई बार आया! पहाड़गंज जैसे घनी आबादी वाले इलाके में कई दिन ठहरा! लेकिन आए दिन कभी कनॉट प्लेस तो कभी सरोजिनी नगर मार्केट में बम धमाकों का गवाह बनने वाला शहर उसकी भनक भी नहीं पा सका। अमेरिकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली से जुड़े आतंक के पदचिह्न् अपनी भयावहता में छब्बीस-इलेवन वाले मुंबई कांड से कम नहीं। वे हमें और हमारी जांच एजेंसियों को आईना दिखा रहे हैं। वे बता रहे हैं कि एक नागरिक के तौर पर हमारी सतर्कता का क्या आलम है। वे बता रहे हैं कि हमारी पुलिस, हमारे रेलवे तंत्र, हमारी हवाई सेवाओं और हमारे इमीग्रेशन नेटवर्क की आंखों में कितनी बार और कितनी आसानी से धूल झोंकी जा सकती है। हेडली से जुड़ी नापाक मशीनरी का ही इरादा बदल गया होगा, वरना हम और हमारा सिस्टम तो एक बार फिर पिटने को तैयार बैठे थे।

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  • Web Title:दो टूक (शुक्रवार, 14 नवंबर 2009)