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तिनका-तिनका जोड कर बनया तीसरा मोर्चा

बंगलुरु देहात के तुमकुर में जेडीएस की मेजबानी में10 पार्टियों के नए गठाोड़ ने तीसर मोर्चे का ऐलान किया तो इससे राष्ट्रीय राजनीति में यूपीए व एनडीए को सीधी चुनौती मिलती दिख रही है। 13 वर्ष पहले 1में इसी कर्नाटक से जब लोकसभा में 16 सांसद चुन कर आए थे तो राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ‘डार्क हॉर्स’ के तौर पर प्रधानमंत्री के लिए चुन लिए गए। तब तीसर मोर्चे के सामने देवेगौड़ा के अलावा विकल्प बहुत कम बचे थे क्योंकि माकपा नेता सुराीत के भारी दबाव के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह दोबारा यह ताज पहनने को राजी नहीं हुए थे। चक्र का पहिया दोबारा फिर उसी धुरी की ओर केन्द्रित हो रहा है। इस बार तीसर मोर्चे में प्रधानमंत्री पद के लिए तीन से ज्यादा दावेदार हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने विशेष चार्टर्ड विमान से सतीश चन्द्र मिश्रा को लखनऊ से बंगलुरु रवाना किया तो तीसर मोर्चे में उत्साह का आलम था। मायावती का पूर देश में कहीं भी वामदलों या दक्षिण की पार्टियों से कोई चुनावी गठबंधन नहीं है। मायावती ने एक तरह से तीसर मोर्चे की रैली में बसपा की हाजिरी लगवाकर आमचुनाव के बाद के समीकरणों पर अपनी नजर गाड़ दी हैं। माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि तुमकुर में तीसर मोर्चे की यह रैली ऐतिहासिक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि गैर-कांग्रेस व गैर-भाजपा का यह गठबंधन देश के बड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही सेकुलर और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखता है साथ ही देश की एकता और विविधता की विरासत का प्रतीक है। भाकपा महासचिव बर्धन ने उम्मीद जाहिर की कि जल्दी ही बीजू जनता दल भी हमार साथ आएगा। बसपा महासचिव सतीश चन्द्र मिश्रा ने कहा कि यह तीसरा मोर्चा नहीं पहला मोर्चा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह विकल्प आर्थिक व स्वतंत्र विदेश नीति के लिए काम करगा। बसपा का यह भी कहना है कि इस चुनाव में देश की जनता कांग्रेस व भाजपा को धराशायी कर डालेगी।ड्ढr कौन पार्टियां हैं तीसर मोर्चे मेंड्ढr माकपा, भाकपा, आएसपी, फारवर्ड ब्लॉक, बसपा, जेडीएस, टीडीपी, एआईएडीएमके, टीआरएस, भजनलाल की हरियाणा जनहित पार्टी। यूएनपीए की कोशिशें फ्लॉप रहींड्ढr यूपी में पिछले विधानसभा चुनाव के पहले जो यूएनपीए बना था, वह बनने के साथ ही हिचकोले खाता रहा। पहले सपा, जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके, टीडीपी, इंडियन नेशनल लोकदल उसका हिस्सा बनें। कुछ दिन के लिए चौधरी अजित सिंह भी उसमें आए। जयललिता सबसे पहले अलग हुईं। हैदराबाद, लखनऊ और हरियाणा में रैलियां हुईं लेकिन यूएनपीए सार कस्मेवादों को भुलाकर तास के पत्तों की तरह बिखर गया। इसमें असम गण परिषद व झारखंड विकास पार्टी ने भी शिरकत की, लेकिन यह मेला कुछ ही दिन का था। यूएनपीए आखिर असमय अपनी मौत मर गया।ड्ढr -----

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  • Web Title: तिनका-तिनका जोड कर बनया तीसरा मोर्चा