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मूल कर्तव्यों से भटका मानव

हम सबको कर्तव्य परायणता के अनुरूप ही चलना चाहिए, लेकिन आधुनिक मानव भौतिकवाद के दलदल में फंस चुका है, जहां से इसका निकलना असंभव है। आतंकवाद, नक्सलवाद, माओवाद, बलात्कार, अत्याचार, रिश्वतखोरी, प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिग जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन इस समाज में बहुत ही कम लोग हैं, जो इन समस्याओं पर मंथन करते हैं। हम विकास, शिक्षा, चिकित्सा विज्ञान जैसी चीजों के लिए जितनी मर्जी ताल ठोंकते रहें, लेकिन जब तक इस संसार का प्राणी जागरूक नहीं बनेगा, यह संसार इसी तरह नरक में फंसता चला जाएगा। देश का युवा वर्ग भी भ्रष्टाचारी गतिविधियों में फंसता जा रहा है। एक समय था जब भारत को पूरे विश्व में सोने की चिड़िया कहा जाता था वह समय फिर दोबारा आ सकता है, लेकिन प्राथमिकता हो इन सभी भ्रष्ट गतिविधियों पर शिकंजा कसने की।
दीवान सिंह चौहान, हरिद्वार
नक्सलवाद जड़ से खत्म हो
देश में नक्सलवाद तेजी से बढ़ता जा रहा है। नक्सल बाहुल्य क्षेत्र की जनता आतंक के आघात को पीठ पर ङोल रही है। लगता है केन्द्र व राज्य सरकारें कोई ठोस उपाय खोजने में असफल दिख रही है। पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड में तो हालात बहुत बिगड़ गए हैं। अभी हाल में ही महाराष्ट्र में चुनाव से एक दिन पहले नक्सली हमले में पुलिस के 18 जवानों की हत्या हुई। देश में नक्सलवाद लोगों के स्थानीय आक्रोश और शासन के नियंत्रण व व्यवस्था के अभाव के कारण पैदा हुआ है। सरकार विकास की बातें तो करती है, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में न बिजली है न सड़कें हैं। अभाव का जीवन जीने के कारण ये लोग हथियार उठाते हैं। जंगल माफिया और ठेकेदारों से वसूली कर हर साल नक्सली लगभग 500 करोड़ रुपये कमा रहे हैं। कमाई का आधा हिस्सा आधुनिक हथियार खरीदने और शेष नक्सलियों के वेतन, भत्ते, इनाम तथा रसद पानी पर खर्च होता है। सभी राजनीतिक दलों और धार्मिक, सामाजिक समुदायों को चट्टानी एकता के साथ मिलकर नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए लड़ना होगा। ठीक उसी तरह जिस तरह पंजाब में आतंकवाद को खत्म किया गया था।
पारुल शर्मा, हर्रावाला, देहरादून
हिन्दी का अपमान असहनीय
हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा और उसका स्वाभिमान है। भारत में हमेशा से हिन्दी और अंग्रेजी के बीच मतभेद रहा है लेकिन कभी हिन्दी के सम्मान को ठेस नहीं पहुंची। हर भारतीय के गुरूर और राष्ट्रभाषा हिन्दी की गरिमा को मनसे कार्यकर्ताओं ने एक ही पल में छिन्न-भिन्न कर दिया। महाराष्ट्र विधानसभा के शपथ ग्रहण समारोह में नवनिर्वाचित विधायक अबू आजमी के साथ र्दुव्यवहार किया गया, क्योंकि वह हिन्दी में शपथ ले रहे थे। आखिर राज ठाकरे क्या साबित करना चाहते हैं कि महाराष्ट्र भारत से अलग है और वो जब चाहें उत्तर भारतीयों पर हमला और हिन्दी भाषा की अवहेलना करेंगे। क्यों ठाकरे ने कभी विकास के लिए झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीबों के उत्थान के लिए आवाज नहीं उठायी। कब तक हमारे नेता राजनीति की आड़ में देश को धर्म और भाषा के नाम पर बांटते रहेंगे। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रतिभा कन्नौजिया, देहरादून

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