DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कांग्रेस से रूठी सपा ले सकती है केन्द्र से समर्थन वापस

महँगाई समेत तमाम मुद्दों पर सोलह नवम्बर को सड़कों पर उतरने की तैयारी में जुटी समाजवादी पार्टी के एजेण्डे पर अब कांग्रेस है। उपचुनावों के नतीजों के बाद पार्टी ने ऐलानिया कह दिया है कि कांग्रेस से उसकी लड़ाई है। ऐसे में केन्द्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापसी के मसले पर पार्टी में गंभीरता से विचार शुरू हो गया है। पार्टी में इस पर आम राय बन रही है कि जब फिरोजाबाद संसदीय सीट पर मुलायम सिंह यादव की बहू के खिलाफ कांग्रेस ने प्रत्याशी उतार कर दोनों के बीच का सियासी लिहाज तोड़ दिया तो समर्थन जारी रखना बेमानी होगा।


पार्टी अभी खुले तौर पर समर्थन वापसी के मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रही लेकिन माना जा रहा है ंिक कांग्रेस से समर्थन की डोर भी तोड़ कर सपा अब खुली लड़ाई का सार्वजनिक ऐलान कर देगी। पार्टी नेताओं के मुताबिक फिरोजाबाद में जो हुआ उसके बाद साथ रहना मुमकिन नहीं। अभी तक दोनों दलों में यह शिष्टाचार चलता था कि दोनों में कोई किसी के बड़े नेता के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारता था। मसलन लोकसभा चुनाव में सपा ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं दिया तो यही कांग्रेस ने मुलायम की सीट मैनपुरी और अखिलेश यादव की सीट कन्नौज में किया था।


सपा को उम्मीद थी कि फिरोजाबाद में घर की बहू डिम्पल यादव को उतारे जाने से कांग्रेस अपना प्रत्याशी देने से परहेज करेगी। कांग्रेस ने न सिर्फ राज बब्बर को उतारा बल्कि खुद राहुल गांधी प्रचार के लिए आए। अब फिरोजाबाद गंवा कर सपा को लग रहा है कि कांग्रेस के साथ समर्थन का रिश्ता बनाए रखने से कार्यकर्ताओं में नाहक भ्रम फैलेगा। पार्टी ने अगस्त में आगरा में हुए विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में भी इस पर चर्चा की थी लेकिन तब कहा गया था कि देखेंगे कांग्रेस कैसा रुख पेश करती है। उसके आधार पर समर्थन जारी रखने का फैसला लिया जाएगा। लेकिन उपचुनाव के नतीजों, खास तौर पर फिरोजाबाद के जनादेश के बाद सपा के सामने समर्थन वापसी का मुद्दा फिर खड़ा हो गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कांग्रेस से रूठी सपा ले सकती है समर्थन वापस