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वर्ल्ड कप में पाक के खिलाफ खेली सर्वश्रेष्ठ पारी: सचिन

वर्ल्ड कप में पाक के खिलाफ खेली सर्वश्रेष्ठ पारी: सचिन

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बीस वर्ष पूरे करने से मात्र कुछ दिन दूर सचिन तेंदुलकर ने कहा कि सेंचुरियन में 2003 विश्व कप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ 75 गेंद में 98 रन उनके कैरियर की सर्वश्रेष्ठ यादगार पारी है।

सचिन ने कहा कि मुझे  कुछ पारियां याद है और इन सबमें पाकिस्तान के खिलाफ 2003 विश्व कप मैच की पारी सर्वश्रेष्ठ है, जिसमें हम छह विकेट से जीते थे। तेंदुलकर ने पाकिस्तान के खिलाफ कराची में 15 नवंबर, 1989 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था और इसी दौरे पर उन्होंने वनडे में भी आगाज किया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद में दूसरे टेस्ट में 59 रन की पारी उनके कैरियर की टर्निंग प्वाइंट रही क्योंकि इसने उन्हें आत्मविश्वास दिया कि वह उच्च स्तर की क्रिकेट खेल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बीस वर्ष लम्बा समय है और मेरे जीवन में कई विशेष लम्हें हैं और इनकी गिनती करना मुश्किल है, लेकिन पहला (टेस्ट) लम्हा, पाकिस्तान में अंतिम एकादश में शामिल होकर पहले दिन मैदान पर उतरना शायद सबसे बड़ा लम्हा है। तेंदुलकर ने कहा कि फैसलाबाद में दूसरे टेस्ट में मैंने 58 या 59 रन बनाए थे। यह मेरे कैरियर का टर्निंग प्वाइंट था क्योंकि इस पारी के बाद मैं आत्मविश्वास से भरा था कि पहले टेस्ट में अच्छा नहीं कर पाने के बावजूद मैं उच्च स्तर का क्रिकेट खेल रहा हूं।

तेंदुलकर ने कहा कि यह लंबी यात्रा थी और इसके बाद मैंने जो किया वह देश में इस खेल के प्रति मेरा योगदान है। देश के लिए खेलना मेरे बचपन का सपना था और मैंने अपना सपना पूरा कर लिया। मैं भाग्यशाली हूं कि अपने देश के लिए इतने समय तक खेल पाया। यह पूछने पर कि 20 साल के उनके कैरियर में खेल में क्या बदलाव आए तो तेंदुलकर ने टवंटी 20 की शुरुआत, अंपायरों की मदद के लिए टीवी रीप्ले का प्रयोग और बल्लेबाजी में किए गए प्रयोगों को चुना। उन्होंने कहा कि 1989 के बाद तीसरे अंपायर का उपयोग से लेकर टवंटी 20 में हाट स्पाट और कई अन्य चीजों जैसे खेल में काफी बदलाव हुए।

तेंदुलकर ने कहा कि सबसे अहम बात यह है कि कई नए शॉट पहले बल्लेबाज कभी कभार खेलते थे लेकिन अब खेले जा रहे हैं। अब खिलाड़ी अधिक जोखिम ले रहे हैं। इसी वजह से वनडे क्रिकेट में बड़े स्कोर बन रहे हैं। अब अच्छी पिच पर 275 का स्कोर आदर्श नहीं कहा जाता। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में भी ऐसा ही है। अब पहले से ज्यादा नतीजे निकल रहे हैं। पहले लोग टेस्ट क्रिकेट से ऊब जाते थे क्योंकि नतीजे कम निकलते थे लेकिन अब अधिक परिणामोन्मुखी मैच हो रहे हैं।

यह पूछने पर कि पिछले 20 साल में उनका खेल कितना बदला है तो तेंदुलकर ने कहा कि मैं बहुत बदल गया हूं। मैं हर मैच के साथ बेहतर होने की कोशिश करता हूं। यह सतत चलने वाली प्रक्रिया है और हर दिन एक नई चुनौती है।

तेंदुलकर ने कहा कि मेरे माता-पिता, भाई, बहन और पत्नी ने हमेशा मेरा साथ दिया। मेरी मां क्रिकेट नहीं समझती लेकिन मेरी और देश की कामयाबी के लिए प्रार्थना करती है। मैंने अपने बड़े भाई से क्रिकेट पर बहुत बात की। दूसरे भाई और बहन ने भी मेरा साथ दिया। मैं अपनी पत्नी से भी क्रिकेट के बारे में बात करता हूं और यही वजह है कि मैं इतने समय तक टिक सका।

तेंदुलकर ने कहा कि इसके अलावा देश के खेल प्रेमियों का प्यार और सहयोग काफी महत्वपूर्ण है। आपको सफलता की साझेदारी करने के लिए लोग चाहिए होते हैं और मेरे पास करोड़ों लोग हैं। यह मेरे लिए काफी है। तेंदुलकर ने 159 टेस्ट में 54.58 के औसत से 42 शतक से 12,773 रन बनाए हैं। पाकिस्तान के खिलाफ 19 दिसंबर से वनडे की शुरुआत करने के बाद उन्होंने 436 मैच खेले, जिसमें 44.50 के औसत से 45 शतक जड़ते हुए 17,178 रन बनाए हैं।

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