DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राजनीतिक दलों की बगावत पर उतरे बागी

विधानसभा चुनाव में कोल्हान क्षेत्र में बागियों की भूमिका भी खास मायने रखेगी। हर दल में बागियों की भरमार है। कुछ खुलकर विरोध कर रहे हैं, तो कुछ परदे के पीछे से। बागियों से सबसे ज्यादा परेशानी भाजपा, झामुमो और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों को है। इन दलों में जमीनी कार्यकर्ता आपस में बंटे दिख रहे हैं। कोल्हान के विधानसभा क्षेत्रों की अब तक की चुनावी तसवीर कुछ इस प्रकार की है।

जमशेदपुर पूर्वी से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रघुवर दास प्रत्याशी हैं। प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष रह चुकी मधुलिका मेहता बागी के रूप में निर्दलीय हैं। जबकि झामुमो के प्रमोद लाल को टिकट दिया गया। आनंद बिहारी दुबे बागी के रूप में मैदान में हैं।

जमशेदपुर पश्चिमी से कांग्रेस से सपा के प्रदेश अध्यक्ष बन्ना गुप्ता को टिकट हासिल किया जिसका पुराने कांग्रेसी खुलकर विरोध कर रहे हैं। इधर झामुमो से अधिकृत प्रत्याशी मोहन कर्मकार हैं। टिकट न मिलने पर झामुमो के तिलो सरदार बागी बन चुनाव मैदान में उतरे हैं। इसके साथ ही जुगसलाई से भाजपा ने राखी राय को टिकट दिया तो हराधन दास बागी होकर निर्दलीय हो गए हैं। कांग्रेस से रितिका मुखी अधिकृत प्रत्याशी तो कांग्रेस के नेता बैजू मुखी, हरि मुखी और गोपाल लोहार विरोध कर रहे हैं। झामुमो से दुलाल भुंईया चौथी बार चुनाव मैदान में, जबकि बागी के रूप में रामचंद्र साइस आजसू प्रत्याशी हैं।            

बहरागोड़ा से भाजपा के दो बार से जीत रहे डॉ. दिनेश कुमार षाड़ंगी फिर मैदान में। कोई बागी नहीं, लेकिन संघ के कैडर नाखुश हैं। झामुमो से विद्युत वरण महतो तीसरी बार मैदान में हैं। लकिन उन्हें चंपई सोरेन और सुमन महतो के समर्थकों का भरपूर सहयोग शायद ही मिले। कांग्रेस-झाविमो गठबंधन की सीट कांग्रेस के खाते में गई। लिहाजा सरोज महापात्र बागी के रूप में निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी अभी तय नहीं हुआ है।

चाईबासा से भाजपा के मनोज लेयांगी को टिकट मिला है। इसका जवाहरलाल वानरा, पुतकर हेम्ब्रम विरोध कर रहे हैं। झामुमो से दीपक बिरुआ अधिकृत प्रत्याशी हैं। लेकिन उन्हें अजरुन वानरा, पुंडुवा सिंह कुंटिया, जिवन हेम्ब्रम का विरोध झेलना पड़ रहा है। कांग्रेस से फिर बागुन सुम्ब्रई प्रत्याशी हैं। इसका अंदर-अंदर विरोध है।

जगन्नाथपुर से भाजपा का टिकट सोनाराम बिरुआ को मिला है। विपिन पुरती और जगदीश सिंकू इसका विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस ने मंगल सिंह सिंकू को प्रत्याशी बनाया है। लेकिन सीट झाविमो के खाते में चली गई। लिहाजा मनमुटाव की नौबत है। इसके इतर खरसावां से भाजपा का टिकट अभी तय नहीं हुआ है। कार्यकर्ता अजरुन मुंडा या उनकी पत्नी मीरा मुंडा को टिकट की मांग कर रहे हैं। कई अन्य नेता भी जुगत में हैं। पोटका से झामुमो का टिकट अमूल्यो सरदार को मिला है, जिसका विरोध रमेश हांसदा कर रहे हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:राजनीतिक दलों की बगावत पर उतरे बागी