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राष्ट्रमंडल खेल से पहले सुनहरा मौका

अगले साल दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल होने हैं। ऐसे में भारतीय पैडलरों के लिए एशियन टेबल टेनिस चैंपियनशिप अपने को परखने का एक सुनहरा मौका है। भले ही एशियाई स्तर पर भारतीय पैडलरों की वजन चीन, जापान जैसे देशों के सामने हल्का हो लेकिन वे एशियन चैंपियनशिप में पूरा जोर लगाने के लिए राजधानी पहुँच गए हैं। भारतीय टीम का मुख्य लक्ष्य अगले साल के राष्ट्रमंडल खेल हैं। इसमें उसे खासकर चीन के खिलाड़ियों से मुकाबला करना होगा। भारतीय टीम के चीफ कोच इटली के मसीमो कांस्टैनटीनी भी यही कहते हैं कि एशियन चैंपियनशिप में भारतीय पैडलर पहले से अच्छा प्रदर्शन करेंगे।


भारतीय पैडलरों को अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियों व खिलाड़ियों के साथ खुलकर खेलने के लिए खूब मौके दिए जा रहे हैं। हाल ही में 10 पुरुष व 10 महिला भारतीय खिलाड़ियों का जत्था चीन के ङोनगडिंग में 17 दिन ट्रेनिंग करके लौटे हैं। यह ट्रेनिंग राष्ट्रमंडल खेलों को ध्यान में रखकर हो रही है। खिलाड़ियों ने चीन के श्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला किया।


कांस्टैनटीनी बताते हैं कि इसका फायदा भारतीय पैडलरों मिलेगा। वह मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत हुए हैं। उनकी स्किल में इजाफा हुआ है। सबसे बड़ी बात यह कि उनकी लाइफस्टाइल और खानपान में भी कुछ बदलाव आया है। टेबल टेनिस के सुपरपावर देश में रहकर दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के साथ खेलने से भारतीय पैडलरों को मानसिक तौर पर भी बढ़ावा मिला है।


भारतीय टेबल टेनिस संघ के सचिव धनराज चौधरी बताते हैं कि भारतीय टेनिस प्रोफेशनलिज्म की तरफ बढ़ रहा है। भारत में इस खेल की प्रतिभा है। इटैलियन कोच कांस्टैनटीनी भी खुश हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहाँ के पैडलरों की शैली काफी कुछ चीनी खिलाड़ियों से मिलती है। पूना का बालेवाडी स्पोर्ट्स काम्पलेक्स का माहौल भी ट्रेनिंग के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा संघ ने मौजूदा राष्ट्रीय चैंपियन शरत कमल के भाई व पूर्व खिलाड़ी रजत कमल को एनालिस्ट की तौर पर जोड़ा है। जो राष्ट्रमंडल खेलों के लिए ही काम कर रहे हैं।

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