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जमीन पर सामूहिक-स्वामित्व बरकरार रखें: चंपिया

बिहार विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर देवेंद्रनाथ चंपिया ने कहा कि तमाम संवैधानिक प्रावधान, कानून और सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णय के बावजूद आदिवासी आज भी शोषित और असुरक्षित हैं। उनकी जमीन की रक्षा के लिए कानूनों को अक्षरशः लागू कराने की जरूरत है। जमीन पर सामूहिक स्वामित्व को बरकरार रखना होगा।

यह बात उन्होंने सीएनटी एक्ट के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित भू-अधिकार सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने समता निर्णय में पांचवी अनुसूची के संदर्भ के साथ स्पष्ट कहा है कि आदिवासी क्षेत्र में किसी गैर आदिवासी को खनन पट्टा नहीं दिया जाए। यदि राष्ट्रहित में जरूरी हो, तो आदिवासियों का को-ऑपरेटिव बना कर उसे पट्टा दिया जाए। चंपिया ने विल्किंसन रूल, शिडय़ूल एरिया डिस्ट्रिक्ट एक्ट 1874, सीएनटी एक्ट, शेड्यूल एरिया रेगुलेशन एक्ट और पांचवी अनुसूची के प्रावधानों का विस्तार से उल्लेख किया।

अधिवक्ता चंद्रभूषण देवगम ने कांग्रेस-झाविमो समझौता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तररूढ़ सरकार ने सीएनटी के एंटी से समझौता कर लिया। समता निर्णय पर यहां महाधिवक्ता ने कहा था कि यह निर्णय झारखंड के लिए प्रासंगिक नहीं है। हमारे जन प्रतिनिधि निष्क्रिय बैठे रहे। पड़हा राजा मंगल राय जड़िया ने कहा चुटिया और नागू मुंडा और उनके वंशजों ने ही झांड़-झंखाड़ से भरे इस क्षेत्र को साफ कर रहने और खेती के लायक बनाया था। उनके वंशज, यहां के आदिवासी आज गुलाम हैं। उनके जल, जंगल, जमीन पर पहले जमींदारों का कब्जा हुआ, अब सरकार का नियंत्रण है।

रिटायर्ड एडीएम पीएनएस सुरीन ने कहा कि सीएनटी एक्ट में जमीन के हस्तांतरण का अधिकार सिर्फ रैयत को है। हममें से कुछ लोग भी इस लूट में सहयोग देते हैं। कहा कि जमीन का अधिकार मानवाधिकार से जुड़ा प्रश्न है, क्योंकि यह भोजन के अधिकार और उसे प्राप्त करने के संसाधन से जुड़ा है। धनिक गुड़िया ने कहा कि हर आदिवासी जमीन से संबंधित सभी दस्तावेज-खतियान, रसीद, खेवट, विलेज नोट, खतियान पार्ट-टू आदि की जानकारी रखे। महिलाओं और बच्चों को भी इन बातों की जानकारी होनी चाहिए।

प्रश्नोत्तर सत्र में यह बात सामने आई कि विलेज नोट, खतियान पार्ट-टू और अन्य दस्तावेजों के लिए तहसील में सक्रिय दलाल अनपढ़ ग्रामीणों से पांच सौ से लेकर कई हजार रुपए तक बसूलते हैं। धनिक गुड़िया ने बताया कि जिला मुख्यालय के रिकॉर्ड रूम में आवेदन और निर्धारित शुल्क देकर वांछित दस्तावेज की कॉपी प्राप्त की जा सकती है।

एसडीसी सभागार में आयोजित सम्मेलन में एक्सआईएसएस के डायरेक्टर फादर एलेक्स एक्का, पड़हा राजा निर्मल हेमरोम, सीरत कच्छप, विनीत मुंडू और कई जनसंगठनों के लोग शामिल हुए।

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