DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बाल फिल्मों का धमाल

बाल फिल्मों का धमाल

पिछले साल मई तक किसी को इस बात की भनक तक नहीं थी कि आखिर ‘फना’ जैसी कामयाब फिल्म बनाने के बाद निर्देशक कुणाल कोहली किस प्रोजेक्ट में व्यस्त हैं। पिछले साल जून में इस बात का खुलासा हुआ कि कुणाल
यशराज बैनर के लिए ‘थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक’ नामक एक फिल्म लेकर आ रहे हैं, जिसमें रानी मुखर्जी और सैफ अली खान के साथ चार बच्चे भी हैं। काफी प्रचार और बड़े सितारों की मौजूदगी के बावजूद फिल्म नहीं चली। यशराज बैनर ने हार नहीं मानी और ठीक तीन महीने बाद ‘रोडसाइड रोमियो’ जैसी एक एनिमेशन फिल्म लेकर आये। इस फिल्म के निर्देशक जुगल हंसराज थे, जिन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में फिल्म ‘मासूस’ (1983) से की थी। इस फिल्म में बच्चे क्या पसंद करेंगे शायद लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा..  से जुगल सीख चुके थे। इस फिल्म में सैफ और करीना के साथ जावेद जाफरी भी थे। कुछ मिले-जुले रिस्पॉन्स के साथ यशराज का यह दूसरा प्रयास भी ज्यादा सफल नहीं रहा। बॉलीवुड के दूसरे कोने में अजय देवगन और शाहरुख खान बच्चों के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट को अंजम देने में जुटे थे। बाल फिल्मों से शाहरुख के जुड़ने की रुचि में इजाफा ‘दि इन्क्रेडेबल’ से हुआ था, जिसके भारतीय संस्करण के लिए उन्होंने डबिंग की थी।

फिलहाल, रेड चिलीज के प्रोजेक्ट का खुलासा नहीं हुआ, पर अजय के ड्रीम प्रोडक्शन के तहत मेगा एनिमेशन फिल्म ‘टूनपुर का सुपर हीरो’ का निर्माण तेजी पर है। महानायक की बात करें तो उन्होंने पिछले साल ‘भूतनाथ’ और हालिया रिलीज ‘अलादीन’ में बच्चों का अच्छा-खासा मनोरंजन किया। इसे बच्चों की फिल्मों के बढ़ते बाजर का ही असर कहा ज सकता है कि अस्सी के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के सीक्वल की बातें सुनने को मिल रही हैं। बच्चों के लिए एक यादगार फिल्म बनाने में फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज भी पीछे नहीं रहे। हालांकि उनकी फिल्म ‘ब्लू अम्ब्रेला’ बच्चों को पसंद नहीं आयी, पर ‘मकड़ी’ जसी फिल्म बना कर उन्होंने बच्चों का दिल जरूर जीता। इंडस्ट्री के दिग्गजों का मानना है कि बच्चों के मूड का कुछ पता नहीं होता। उन्हें अगर ‘बाल हनुमान’ जैसी एनिमेटिड फिल्म पसंद आती है तो वह उसके सीक्वल यानी ‘हनुमान रिटर्न्स’ को नकार देते हैं। बच्चों ने ‘माई फ्रैंड गणोशा’ जसी फिल्म को उस दौर में पसंद किया, जब हॉलीवुड से नार्निया, हैरी पॉटर और स्पाइडरमैन जैसी फिल्में बाजर में आ रही थीं, लेकिन गणोशा के बाल रूप ने बच्चों का मन मोह लिया।

मौजूदा दौर की बात की जए तो जुगल हंसराज को देखते हुए अभिनेता आफताब शिवदासानी ने भी उनके नक्शे कदम पर चलने की कोशिश की है। आफताब ‘आओ विश करें’ से फिल्म निर्माता बने हैं। गौरतलब है कि आफताब ने भी सन 1987 में ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ से अपने अभिनय की शुरुआत की थी। बहुत कम लोगों को पता होगा, लेकिन इसी फिल्म के निर्देशक एवं कोरियोग्राफर अहमद खान भी थे। इस साल के सबसे चर्चित गीत ढैन टै ढैन.. (फिल्म कमीने) की कोरियोग्राफी उन्होंने ही की है। बॉलीवुड में ऐसे कई सितारे मिलेंगे, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार से की और बाद में खूब नाम कमाया। डेजी ईरानी की याद लोगों के जेहन में आज भी ताज होगी। डेजी ईरानी ने 1955 में फिल्म ‘बंदिश’ से शुरुआत की। अपने लंबे फिल्मी करियर में डेजी ने बालिका होते हुए बालकों के किरदार ज्यादा अदा किये। आज यह करिश्मा अहसास चान्ना दिखा रहे हैं। उन्हें बालक होते हुए बालिका के रोल ज्यादा ऑफर हुए हैं। पिछले साल की हिट हॉरर फिल्म ‘फूंक’ में उन्हीं की तूती बोलती दिखाई दी। जी हां, वह अहसास चान्ना ही हैं, जिनके खाते में आज ‘माई फ्रैंड गणोशा’ जसी हिट फिल्म है। इस फिल्म के 2 सीक्वल भी बन चुके हैं।

अब सचिन को ही लीजिए। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने अपना फिल्मी सफर 1963 में शुरू किया, लेकिन सन 1967 में आयी ‘मझली दीदी’ से उन्हें पहचान मिली। उन्होंने ‘बचपन’, ‘हिम्मत’, ‘सफर’ और ‘प्रेम पुजरी’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी। एक जमाने में बाल कलाकार के रूप में जूनियर महमूद ने बड़ी धूम मचाई थी। उन्होंने 1967 में ‘नौनिहाल’ से अपने अभिनय की शुरुआत की, पर उन्हें नेम और फेम मिला फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ से। अच्छी प्रतिभा के बावजूद जूनियर महमूद को बड़े होने पर डेजी ईरानी और सचिन जसी सफलता और पहचान न मिल सकी। देखा जाए तो डेजी इरानी, सचिन, सरिका, नीतू सिंह, जूनियर महमूद जसे बाल कलाकारों ने स्टारडम का शिखर छूने के लिए बड़ी मेहनत की थी। उन्हें ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ के अजहरुद्दीन और रुबीना की तरह रातोंरात शोहरत नहीं मिली थी। उस जमाने में बाल कलाकारों के पास न तो फैशनेबल रैम्प का जलवा था और न ही टीवी इतना ताकतवर मीडिया था कि वह बचपन में ही स्टार बन पाते। हां, लेकिन उन कलाकारों ने फिल्म दर फिल्म अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज जरूर किया। बाल कलाकार के रूप में तबस्सुम को कौन भूल सकता है। 1947 में उन्होंने बेबी तबस्सुम के नाम से फिल्म ‘मेरा सुहाग’ से अपने अभिनय की शुरुआत की, पर उन्हें नोटिस किया गया फि ल्म ‘बड़ी बहन’ से, जो कि 1949 में आयी थी। टीवी पर भी उन्होंने अपनी सफल पारी खेलते हुए अस्सी के दशक में ‘फूल खिले हैं गुलशन गुलशन’ में सितारों के साक्षात्कार लिए और देखते-देखते वह घर-घर में छा
गयीं थीं। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बाल फिल्मों का धमाल