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चक्रवात

हाल में मुंबई में फयान चक्रवात के आने की संभावना से शहर बंद रहा था। सौभाग्यवश चक्रवात से वहां नुकसान नहीं हुआ, लेकिन चक्रवातों का आवागमन अक्सर तटीय क्षेत्रों में होता रहता है। चक्रवातों के बारे में पहला तथ्य है कि यह ज्यादातर मौसम विज्ञान के अनुसार पृथ्वी की धुरी की दिशा में ही घूमते हैं। लेकिन पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में यह घड़ी की विपरीत दिशा और दक्षिणी गोलार्ध में यह घड़ी की दिशा में घूमते हैं। ऐसा ‘कोरिओलिस इफेक्ट’ के कारण होता है। घूमते समय हवा इनमें बाहर से अंदर की ओर जाती है। ‘एंटी साइक्लोन’ उत्तरी गोलार्ध में आम चक्रवातों की विपरीत दिशा में घूमता है।
विशाल चक्रवात हमेशा कम दबाव वाले क्षेत्रों में आते हैं। सबसे कम दबाव वाले चक्रवात बर्फीले ध्रुवीय क्षेत्रों में आते हैं। उष्ण केंद्र वाले चक्रवात जैसे ट्रॉपिकल साइक्लोन और मीसोसाइक्लोन मौसमी आकलन के छोटे मापक मीसोस्केल पर पड़ते हैं। पृथ्वी के अतिरिक्त चक्रवात मंगल और वरुण (नेप्चयून) ग्रह पर भी देखे गए हैं।
वैज्ञानिकों ने चक्रवात को मुख्यत: छह श्रेणियों में बांटा है। यह हैं पोलर साइक्लोन, पोलर लो, एक्स्ट्रा ट्रॉपिकल साइक्लोन, सबट्रॉपिकल साइक्लोन, ट्रॉपिकल साइक्लोन और मीसोसाइक्लोन। सभी तरह के चक्रवातों में जो सबसे बड़ी समानता है वह ये कि सभी कम दबाव के क्षेत्र होते हैं। उनका केंद्र उस क्षेत्र का सबसे कम दबाव वाला क्षेत्र होता है जिसे बड़े चक्रवातों में ‘आई’ यानी आंख कहा जाता है। इनके केंद्रों के पास के दबाव का क्षेत्र और इसके बाहरी क्षेत्र के दबाव का आपस में संतुलन होना चाहिए वरना चक्रवात अपने में ही सिमटकर समाप्त हो सकता है।

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