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गपबाजी से तौबा

यह सही है कि चाय या कॉफी की चुस्कियां कुरकुरे बिस्किट या गर्म पकौड़ों के साथ कई गुना ज्यादा मज़ा देती हैं और इसमें रसीले गप का तड़का लग जाए, तो फिर कहने ही क्या? लेकिन याद रखें, दफ्तर में गपबाज़ी का ये शौक कई बार ऐसी मुसीबत बन सकता है, जिससे आपकी नौकरी ही खतरे में पड़ जाए।
कौन बच पाया इससे?
अक्सर होता ये है कि काम करते-करते ऊब जाने पर कर्मचारी कॉफी वेंडिंग मशीन की तरफ खिंचे चले आते हैं, और बालकनी या बरामदे में खड़े होकर रिलेक्स होने की कोशिश में गपबाज़ी का ऐसा दौर चल पड़ता है कि बॉस से लेकर नए सहकर्मी की चाल-ढाल, और पुराने साथियों के बदलते बर्ताव से लेकर टॉप मैनेजमेंट में चल रहे राजनीतिक शह और मात के खेल तक- हर मुद्दे पर हर कोई अपने विशेष ज्ञान और विश्लेषण कौशल का परिचय देने लगता है। ये बहस इतनी दिलचस्प होती है कि हर कोई तरोताज़ा महसूस करता है।
नुकसान हैं कई
दफ्तर की ऐसी गपबाज़ी से हकीकत का कोई लेना-देना होता नहीं है। बस, शरारती तत्व कथनों को संदर्भ से काट कर, मैनेजमेंट के कच्चे कानवाले अधिकारियों के आगे पेश कर अपना उल्लू सीधा करने में कामयाब हो जाते हैं। अक्सर गप की शुरुआत का मकसद आमतौर पर सामने न आने वाली सूचनाएं हासिल करने के लिए की जाती है। लोग किसी चौंका देने वाली काल्पनिक जानकारी का चारा फेंक कर सामने वाले की प्रतिक्रिया को ध्यान से देखते हैं, और फिर उसके मुंह से मतलब की खबर या खास टिप्पणी निकलवाने का जतन करने लगते हैं। गपबाज़ लोग ऐसे जाल में फंसकर अपना नुकसान करवा बैठते हैं। मैनेजमेंट इस प्रवृत्ति को कतई पसंद नहीं करता, और कई बार इसे बैन करने के लिए टी-ब्रेक और मशीन की सुविधा भी हटा देता है।

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