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पुरुष हथकंडा है ‘लव जेहाद’ का हल्ला

हाल में भारत में नक्सलवाद की बढ़ती चुनौती पर एक टीवी परिचर्चा हुई। इसमें हिस्सा लेने वाले कई सहभागी भारतीय लोकतंत्र की ताकत का चमकदार वर्णन कर रहे थे और बता रहे थे कि किस प्रकार सभी भारतीयों को उस आजादी और सहिष्णुता का उत्सव मनाना चाहिए, जो देश को हासिल है। अगर आप लगातार अपनी तुलना उन देशों से करें, जहां अलग तरह की सरकार है तो आप मान सकते हैं कि वास्तव में यह ऐसा देश है, जो अपने सभी नागरिकों को चयन की आजादी देता है।
जैसा कि हम जानते हैं कि हकीकत इससे काफी अलग है। उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए चयन की आजादी जैसा कुछ नहीं है जिनकी जमीनें उद्योगों, विशेष आर्थिक क्षेत्र और बड़े बांधों या अन्य ढांचागत संरचनाओं के लिए अधिग्रहीत कर ली जाती हैं। अपने अधिकारों की मांग कर रहे उन आदिवासियों के लिए भी चयन की आजादी का कोई मतलब नहीं है, जिन्हें बताया जाता है कि जिस जमीन को उन्होंने तैयार किया है और जिस पर वे निर्भर हैं, उसके नीचे तो खनिज भरा पड़ा है। इसके अलावा उन बहुसंख्य भारतीय महिलाओं के लिए चयन की आजादी की कोई मतलब नहीं है, जिनका जीवन पितृसत्ता, समुदाय, जाति, धर्म और सामाजिक वर्ग से निर्धारित होता है। अगर वे उनमें से किसी ढांचे को तोड़ती हैं तो या तो उनकी जान ले ली जाएगी या वे समाज से बाहर कर दी जाएंगी।  इसी संदर्भ में केरल और दक्षिण कन्नड़ा (कर्नाटक) से तथाकथित ‘लव जेहाद’ भी चल रहा है। कहा जाता है कि पहले मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को फंसाते हैं और बाद में उनसे इस्लाम कबूल करवा लेते हैं। इसकी खुसुर-फुसुर केरल के एक अखबार में छपी खबर से शुरू हुई और बाद में उसे हिंदू जनजागृति समिति (हिंदुओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने का दावा करने वाले संगठन) और दक्षिण कर्नाटक के अन्य संकीर्ण संगठनों ने उठाया। इंटरनेट और जनप्रदर्शनों के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि केरल और कर्नाटक में हजारों हिंदू लड़कियों को फंसा कर इस्लाम कबूल करवा लिया गया है और राज्य सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।

इस काम में अदालतों को भी शामिल कर लिया गया। पहले केरल हाईकोर्ट और फिर कर्नाटक हाईकोर्ट ने जांच का आदेश जारी किया। केरल के पुलिस महानिदेशक हाईकोर्ट को बता चुके हैं कि ‘लव जेहाद’ या ‘रोमियो जेहाद’ जैसा कोई समूह नहीं है। फिर भी खबरों पर जांच चल रही है। कर्नाटक हाईकोर्ट भी जांच का आदेश दे चुका है और मानता है कि सुरक्षा के अलावा महिलाओं के देहव्यापार के कारण इस मामले काराष्ट्रीय असर पड़ सकता है। हालांकि केरल पुलिस की तरह कर्नाटक पुलिस भी इसे निराधार बता चुकी है। पर हिंदू जनजागृति समिति का दावा है कि दक्षिण कन्नड़ा में तीन हजार हिंदू लड़कियां और पूरे राज्य में तीस हजार लड़कियां गायब हैं। पुलिस का कहना है कि सितंबर 2009 तक 404 लड़कियों के गायब होने की खबरें थीं, जिनमें से 332 को पुलिस ने ढूंढ़ निकाला है। अक्टूबर के अंत तक सिर्फ 57 महिलाएं गायब थीं।

पुलिस का यह भी कहना है कि जहां गायब होने वाली महिलाएं प्रेमी के साथ भागी हैं, उनमें ऐसे गैर हिंदुओं के अलावा हिंदुओं के हिंदुओं के साथ भागने के भी काफी मामले हैं। दक्षिण कन्नड़ा की पुलिस ने बताया कि 22 साल की एक लड़की जो जून से गायब थी और जिसके बारे में ‘लव जेहाद’ के शिकंजे में पड़ने की अफवाह थी, उसे दरअसल एक सीरियल हिंदू किलर ने मारा था। बाद में उसने अपना अपराध कबूल कर लिया था।
अगर केरल पुलिस और कर्नाटक पुलिस की बात सही है तो माना जाना चाहिए कि लव जेहाद उसी तरह वितंडा है, जैसे कहा गया था कि मंगलूर के पब में शराब पीने वाली लड़कियां भारतीय संस्कृति के लिए खतरा हैं। जी हां आज आतंकवाद और ‘लव जेहाद’ के खिलाफ लड़ाई लड़ने वही प्रमोद मुतालिक और श्रीराम सेने के लोग आगे आए हैं।
लेकिन यह कहानी ‘लव जेहाद’ पर ही नहीं खत्म होती। केरल में भारतीय जनता पार्टी के मुखपत्र ‘जन्मभूमि’ ने हाल में एक महिला पत्रकार को इसलिए बर्खास्त कर दिया, क्योंकि उसने एक ईसाई से विवाह कर लिया था। उनका कहना था कि वे एक धर्मपरिवर्तन करने वाले को नौकरी पर नहीं रख सकते, क्योंकि वे इसके खिलाफ हैं। हिंदू संगठनों की तरफ से मुस्लिम विरोधी भावनाएं फैलाए जाने के लिए जिस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, उस पर हंसा ही जा सकता है। लेकिन हम इसे हल्के ढंग से नहीं ले सकते। हर भारतीय को संविधान के तहत चयन की आजादी का अधिकार है। विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत विभिन्न आस्थाओं के लोग या एक ही आस्था के लोग एक सेक्यूलर सिविल लॉ के तहत विवाह कर सकते हैं। यह कानून विवाह को दो वयस्कों के बीच की एक संविदा मानता है। विवाह करने वाले पुरुष या स्त्री अगर बालिग हैं तो वे विवाह के लिए व्यक्ति और कानून का चयन करने के लिए स्वतंत्र हैं। इनमें से अगर एक पार्टनर अपनी स्वतंत्र इच्छा से दूसरे का धर्म अपनाने का फैसला करता है तो इसकी भी संविधान ने गारंटी दे रखी है। यह नितांत निजी दायरा है और इस मामले में हिंदू जनजागरण समिति या प्रमोद मुतालिक किसी को अपने संकीर्ण विचारों के तहत हस्तक्षेप का हक नहीं है।

यहां पर मीडिया का काम यह है कि वे इस तरह की बकवास को बेनकाब करें और जनता के सामने सारे तथ्य रखें। दुर्भाग्य की बात है कि केरल और कर्नाटक में मीडिया का इस्तेमाल इस अफवाह को बढ़ावा देने के लिए किया गया है, न कि जनता के सामने पूरे तथ्य रखने के लिए। लेकिन इस प्रकार के दुराग्रहों में अफवाहों की ताकत इतनी ज्यादा है कि झूठ को लगातार दोहराते जाने से सच्चई भुला दी जाती है। प्रतिस्पर्धी विचारधाराओं की लड़ाई में महिलाएं बीच में फंस जाती हैं। जब पुरुष अपनी प्रधानता कायम करने के लिए लड़ाई लड़ते हैं तो महिलाओं को अधीनस्थ कर दिया जाता है और उन्हें अपनी स्वतंत्र इच्छा व्यक्त करने का मौका नहीं दिया जाता। महिलाएं लोकतांत्रिक देश की मुक्त नागरिक हैं। इस तरह की अफवाहें और दुराग्रही प्रचार आखिरकार महिलाओं पर ज्यादा नियंत्रण कायम करते हैं। यह सब वास्तविक अर्थो में एक आजाद और लोकतांत्रिक समाज की भावना के खिलाफ है।
 
kalpu.sharma@gmail.com
लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं

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