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ऊँची शिक्षा का स्तर

जहां उच्च शिक्षा में उदारीकरण को रफ्तार देने की कोशिश चल रही है, वहीं उसकी गुणवत्ता की चिंता भी बढ़ रही है। इसीलिए सरकार एक तरफ विदेशी विश्वविद्यालयों के आगमन के रास्ते आसान कर रही है तो दूसरी तरफ तमाम संस्थाओं की ढांचागत तैयारियों का आकलन भी कर रही है। विदेशी विश्वविद्यालयों को अनुमति देने की औपचारिकता अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन उसकी आहटें शुरू हो गई हैं। औपचारिक प्रक्रिया तो तब पूरी होगी, जब संसद से इस बारे में विधेयक पास होगा। उससे पहले मानव संसाधन मंत्रलय ने विदेशी विश्वविद्यालयों को कैम्पस खोल कर कन्सलटेंसी करने की अनुमति दे दी है। यह ऐसा काम है, जिसके जरिए उन्हें ज्यादा फीस दे पाने की क्षमता न रखने वाले भारतीय छात्रों को आकर्षित करने में सुविधा होगी। क्योंकि वे अपने खर्च का बड़ा हिस्सा कन्सलटेंसी से निकाल सकेंगे और छोटा हिस्सा फीस के तौर पर हासिल करेंगे। अच्छे किस्म के विदेशी विश्वविद्यालयों को भारतीयों के लिए सुलभ बनाना अच्छी बात है और अगर इससे शिक्षा की अर्थव्यवस्था का प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर ढांचा बनता है तो बेहतर स्थितियां बनेंगी। लेकिन इस बदलाव के साथ एक बड़ी चिंता शिक्षा और उसे देने वाली संस्थाओं की गुणवत्ता को लेकर है। वह चिंता छात्रों, शिक्षकों से लेकर मानव संसाधन मंत्रालय तक के भीतर है। इसके लिए मानव संसाधन मंत्रालय ने जो कमेटी बिठाई थी उसकी रपट ने देश के डीम्ड विश्वविद्यालयों की बहुत सारी कमियां उजागर की हैं। रपट के अनुसार देश में 40 ऐसे डीम्ड विश्वविद्यालय हैं जिनका स्तर इसके लायक नहीं है। इनमें ज्यादातर प्राइवेट हैं। जबकि 38 का स्तर बेहतरीन है और 44 ऐसे हैं, जिनके ढांचे, प्रशासन और शोध व्यवस्था में सुधार कर उन्हें डीम्ड के लायक बनाया जा सकता है।
 
उम्मीद थी कि इस कमेटी की रपटों के आधार पर सरकार गुणवत्ता का स्तर बनाने के लिए कार्रवाई करेगी। लेकिन अब इस मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के साथ तालमेल करने और ज्यादा सख्ती न करने को कहा गया है। इसकी एक वजह तो शिक्षा के निजीकरण और उदारीकरण को उदारता पूर्वक मौका देने की है। दूसरी वजह राजनीतिक दबाव के रूप में भी सामने आ रही है। लेकिन इन्हीं स्थितियों के बीच शिक्षा को राजश्रय देने और यशपाल समिति के सुझावों अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखने का तरीका भी निकालना होगा। क्योंकि घरेलू शिक्षा का स्तर ठीक रहेगा तभी बाहर के अच्छे विश्वविद्यालय भी आकर्षित होंगे।

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