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दलाई लामा के बारे में चीन ने उगला जहर

दलाई लामा के बारे में चीन ने उगला जहर

दलाई लामा और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच किसी भी मुलाकात के खिलाफ अपने विरोध पर कायम रहते हुए चीन ने गुरुवार को तिब्बत की कथित दास प्रथा और अमेरिकी दास प्रथा को समानान्तर रखते हुए कहा कि अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति को तिब्बती नेता के बारे में उसके रुख को समझना चाहिए।

चीन की आधिकारिक एजेंसी के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता किन गांग ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि चीन अंतरराष्ट्रीय पटल पर दलाई लामा की गतिविधियों के विरोध में है और वह दलाई लामा एवं विदेशी सरकारों के शीर्ष अधिकारियों के बीच कोई भी नाम या स्तर पर किसी भी तरह के संपर्क के खिलाफ है। उन्होंने दलाई लामा और ओबामा के बीच एक संभावित बैठक के बारे में पूछे जाने पर यह बात कही।

किन ने चीन के आरोप को दोहराते हुए कहा कि 1959 में दलाई के भारत में निर्वासन से पहले उन्होंने एक सामंतवादी दास प्रथा का नेतृत्व किया, जिसे चीन सरकार ने खत्म कर दिया। किन ने कहा कि तिब्बत में दास प्रथा की समाप्ति उतनी ही अहमियत रखती है जितनी कि अमेरिका में दास प्रथा का अंत होना।

गौरतलब है कि ओबामा ने अपने एक भाषण में कहा था कि वह राष्ट्रपति लिंकन के बहुत आभारी हैं क्योंकि उनके बिना वह अमेरिका का प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति नहीं बन पाते।

प्रवक्ता ने कहा कि चूंकि ओबामा दास प्रथा को खत्म करने वाले लिंकन के प्रशंसक हैं, इसलिए चीन मानता है कि ओबामा तिब्बत की स्वतंत्रता और देश को तोड़ने की दलाई लामा के प्रयासों का विरोध को लेकर उसके रुख को समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक अश्वेत राष्ट्रपति होने के नाते वह दास प्रथा की समाप्ति के महत्व को समझते हैं। किन ने कहा कि हम अमेरिका से चीन की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय एकता का सम्मान करने की मांग करते हैं।

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