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दिल्ली के पावर प्लांटो की स्थिति खराब

बेशक मांग कम रहने के कारण राजधानी वासियों को बिजली संकट नहीं झेलना पड़ रहा है, वरना दिल्ली के अपने पॉवर प्लांटों की हालत खस्ता होती जा रही है। गुरुवार को राजधानी के चार में दो प्लांट ठप रहे, जबकि दो प्लांटों की कई यूनिटें भी ठप हैं।

दिल्ली सरकार के चार पॉवर प्लांट हैं, जबकि एनटीपीसी द्वारा संचालित बदरपुर थर्मल पॉवर स्टेशन (बीटीपीएस) की भी सारी बिजली दिल्ली को मिलती है और बीटीपीएस ही दिल्ली को सबसे अधिक लगभग 705 मेगावाट बिजली देता है। शेष चार प्लांट की उत्पादन क्षमता लगभग 995 मेगावाट है। यानी दिल्ली के पॉवर प्लांटों की उत्पादन क्षमता लगभग 1700 मेगावाट है और गुरुवार को इन प्लांटों ने मात्र 940 मेगावाट ही उत्पादन किया। इसमें से भी बीटीपीसी का उत्पादन 510 मेगावाट रहा। यानी दिल्ली सरकार के पॉवर स्टेशनों ने लगभग 430 मेगावाट ही उत्पादन किया।

कानूनी पचड़े में फंसा इंद्रप्रस्थ पॉवर स्टेशन ने तो तीन नवंबर से ही उत्पादन बंद कर दिया है, क्योंकि सरकार द्वारा प्लांट को बंद करने के आदेश के बाद प्रबंधन ने कोयला नहीं मंगाया और कोयला न होने के कारण उत्पादन नहीं हो पा रहा है। गैस की कमी के चलते गैस टरबाइन पॉवर स्टेशन (जीटी) की भी कई यूनिटें ठप ही चल रही हैं। गुरुवार को भी गैस टरबाइन की चार यूनिटें बंद रही। लगभग 135 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले राजघाट पॉवर स्टेशन भी गुरुवार को ठप रहा। बताया गया है कि टय़ूब लीकेज की वजह से दोनों यूनिटें ठप पड़ी हैं। इतना ही नहीं, बीटीपीएस की भी 95 मेगावाट वाली एक यूनिट भी गुरुवार को ठप रही। गुरुवार को बिजली की अधिकतम मांग 2790 मेगावाट रही और दिल्ली को केंद्रीय पूल से 1850 मेगावाट से अधिक बिजली मिलने के कारण हालात नहीं बिगड़े।

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