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22 साल पहले गायब हुई लड़की पति के साथ अचानक घर लौटी

एक लड़की के फर्जी अपहरण की रिपोर्ट एवं पुलिस की गलत विवेचना ने जोगबनी के तीन परिवारों को तबाह कर दिया है। इसमे एक महिला की सामाजिक जलालत व सदमे में मौत हो गई। अब जब लड़की वापस घर आई और पूरे मामले का खुलासा किया तो लोगों के होश उड़ गए। इस पूरे प्रकरण से सर्वाधिक किरकिरी पुलिस विभाग की हो रही है।

करीब 22 वर्ष पूर्व जोगबनी निवासी बालेश्वर राउत ने अपनी 14 वर्षीया बेटी नीलम के अपहरण का मामला दर्ज करवाया था। इसमें उसने सुगिया देवी, उसके पुत्र राम किशुन यादव तथा गुड्ड मियां को नामजद अभियुक्त बनाया था। पुलिस ने विवेचना के बादं तीनों की  चाजर्शीट कोर्ट में दाखिल कर दी। अदालत ने तीनों को दोषी करार देकर सजा सुना दी। दो अभियुक्त राम किशुन एवं गुड्ड घर बार छोड़कर फरार हो गए।

अदालत ने मामले को संज्ञान में लेते हुए दोनों को फरार घोषित कर दिया। लेकिन महिला सुगिया देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में महिला को अररिया से भागलपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। यहां लंबी सजा काटने के बाद परिजनों की अपील पर उसे जमानत मिल गई लेकिन जलालत का सदमा वह ङोल नहीं पाई और उसकी मौत हो गई। इस घटना ने नया मोड़ तब लिया जब बुधवार को कथित अपहृत लड़की नीलम पति के साथ अपने घर पहुंची।

उसे देख परिजन भी हक्के-बक्के रह गए। नीलम ने परिजनों को बताया कि उसका अपहरण हुआ ही नहीं, वह तो धोखे से घर से चली गई थी। पहले दस वर्ष वह दिल्ली में रही फिर दस वर्ष तक मुम्बई में। मुम्बई में ही उसने शादी भी रचाई। एक फर्जी मामले में पुलिस की विवेचना की गड़बड़ियों से दर-दर की ठोकरें खा रहे दोनों अभियुक्तों के समक्ष अभी भी जीवन संकट बना हुआ है।

पुलिस स्टेशनों समेत अदालत में यह फाइल क्लोज की जा चुकी है। इधर फारबिसगंज डीएसपी ने मामले को गंभीर बताते हुए पुन: तफ्तीश करने की बात कही है। इस मामले को लेकर वादी पक्ष एवं पुलिस विभाग में खासा हड़कंप मचा हुआ है।

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