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सीपीडब्ल्यूडी को राज्य सरकार का अल्टीमेटम

सड़क निर्माण कर रही केन्द्रीय एजेंसी सीपीडब्ल्यूडी को राज्य सरकार ने अल्टीमेटम दिया है। जून 2010 तक सड़क निर्माण पूरा करने की हिदायत देते हुए राज्य सरकार ने सीपीडब्ल्यूडी के कार्यों में गुणवत्ता की आ रही शिकायतों को दूर करने का भी निर्देश दिया है।

सीपीडब्ल्यूडी को 29 पैकेजों के अन्तर्गत 1667 किमी. स्टेट हाइवे (एसएच) सड़क निर्माण सौंपा गया है। पहले से तय अवधि समाप्त होने के बावजूद सीपीडब्ल्यूडी अब तक 2054.43 करोड़ रुपए में से अब तक 1469.41 करोड़ रुपए खर्च कर पाया है। पथ निर्माण मंत्री प्रेम कुमार ने सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को जून 2010 तक बचे 585 करोड़ रुपए खर्च कर सड़क निर्माण समाप्त करने की हिदायत दी है।

कुमार ने कहा है कि सीपीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई जा रही आठ सड़कों में गुणवत्ता की शिकायत आई है। बिहटा-विक्रम--पाली पथ (एसएच- 2), गया-दाउदनगर पथ (एसएच-7), दनियावां-एकंगरसराय--इसलामपुर (एसएच- 4), मोतिहारी-ढाका--बेलवाघाट पथ (एसएच- 54), सुलतानगंज-दर्दमारा पथ (एसएच-22), सोनबरसा-बैजनाथपुर पथ (एसएच- 59), भागलपुर-हंसडीहा पथ (एसएच-19) और सहरसा-सुपौल पथ (एचएच-66) का निर्माण निर्धारित मानक के मुताबिक नहीं हो रहा है। यहीं नहीं सड़क किनारे नाले का निर्माण भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन कमियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। सीपीडब्ल्यूडी अपने स्तर से इन कमियों पर कार्रवाई करे। वह यह सुनश्चित करे कि डिफेक्ट लायबलिटी नीति के अनुसार ठेकेदार सही कार्य करे।

उन्होंने कहा कि सीपीडब्ल्यूडी यह बताए कि उसके द्वारा गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अब तक क्या-क्या कार्रवाई की गई है। उसने कितने ठेकेदारों को दंडित किया है। उन्होंने कहा कि सीबीडब्ल्यूडी के स्तर से कार्रवाई नहीं होगी तो राज्य सरकार अपने स्तर से कार्रवाई करेगी। मंत्री द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में सीबीडब्ल्यूडी के उप महाप्रबंधक, पथ निर्माण विभाग के उत्तर और दक्षिण बिहार के चीफ इंजीनियर समेत विभाग के कई अधिकारी उपस्थित थे।

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