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गैर-कृषि कार्य में नहीं लगेंगे प्रखंड कृषि पदाधिकारी

सूबे के प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को गैर-कृषि कार्य में नहीं लगा सकेंगे जिलाधिकारी। कृषि मंत्री रेणु कुमारी ने राज्य के किसानों की समस्याओं को करीब से देखा तो उनके निराकरण के लिए यह आदेश जारी कर दिया। रबी फसल की कटनी तक यह आदेश लागू रहेगा। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारियों को यह भी ताकीद की है कि वे खाद की कालाबाजारी पर खुद नजर रखें। हर हाल में किसानों को समय और उचित मूल्य पर खाद मिलनी चाहिए।

किसान मेलों में उमड़ती भीड़ से उत्साहित मंत्री ने यह आदेश भी जारी किया है कि मुख्यालय द्वारा आयोजित मेलों की समाप्ति के बाद जिलों में भी स्थानीय स्तर पर किसान मेले आयोजित किये जाएं। किसान मेलों के उद्घाटन के सिलसिले में कृषि मंत्री एक पखवाड़े से सूबे के विभिन्न जिलों में भ्रमण कर रही हैं। वे अब तक 18 जिलों में आयोजित किसान मेलों में भाग ले चुकी हैं। किसानों की हर समस्या से वे खुद परिचित हो रही हैं।
मेले में रिकार्ड भीड़ को देखते हुए उन्होंने खुद पहल करके, कई जिलों में दो दिन लगने वाले मेलों की अवधि बढ़ाकर तीन दिन कर दी। बावजूद कृषि यंत्रों के स्टॉलों पर भीड़ कम नहीं हुई। कृषि उप निदेशक (सूचना) ए. सी. जैन ने बताया कि मेलों में छोटे यंत्रों की रिकार्ड बिक्री हुई है। विभाग अब तक दस करोड़ का व्यवसाय कर चुका है।

बेतिया, मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल और मधेपुरा जिलों में तो मेले की अवधि दो दिन से बढ़ाकर तीन दिन करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि कृषि विकास शिविरों के तुरंत बाद किसान मेलों के आयोजन से किसानों का भरोसा बढ़ा है। उन योजनाओं से भी परिचित हो गए, जिसका लाभ अब तक वे नहीं ले पाते थे।

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