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दरवाजे पर पहुंचते ही चिल्लाएगी चोरी की किताब

विवि की लाइब्रेरी में मौजूद लाखों किताबों में से अपने मतलब की एक किताब चुराकर चुपचाप घर ले जाने की बात भूल जाइए। चोरी से उठाकर लाई गई किताब गेट पर पहुंचते ही चिल्लाने लगेगी। किताब में वाइब्रेशन होगा। अलार्म बजेगा। जब तक आप माजरा समझोंगे तब तक सिक्योरिटी गार्ड आपकी गर्दन दबोच लेगा। पकड़े जाओगे और विवि को जो करना होगा वह करेगा। विवि की नजरों में आप किताब चुराने के गुनहगार हो जाएंगे।

बिना इश्यू कराए किताब चुराकर घर ले जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोकने को विवि ने नई तकनीक को अमलीजामा पहनाने की ठान ली है। विवि को यह सोच लाइब्रेरी में मौजूद सिर्फ एकमात्र पुस्तक के उठने के बाद आई। एक स्टूडेंट रैक से इस किताब को बिना इश्यू कराए घर ले गया। अन्य छात्रों ने मांगी तो किताब को ढूंढा गया।

खोजबीन पर पकड़े जाने के डर से छात्र किताब को पीएचडी सेक्शन में दबाकर चला गया। इसके बाद विवि ने लाइब्रेरी में मौजूद डेढ़ लाख पुस्तकों में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन चिप लगाने का फैसला कर लिया। चिप लगाते ही लाइब्रेरी के इंट्री गेट पर एक  कंप्यूटर ऑपेरिंटग सिस्टम लगेगा। यह सिस्टम चिप के एक्टिव-डीएक्टिव कोड को पकड़ेगी। छात्र जब किताब इश्यू कराएगा तो चिप डीएक्टिव की जाएगी। ऐसे में इंट्री गेट से गुजरने पर चिप आवाज नहीं करेगी, लेकिन बिना इश्यू कराए किताब लाई गई तो चिप एक्टिव रहेगी और गेट पर पहुंचते ही सक्रिय हो जाएगी।

सिस्टम के दायरे में आते ही पुस्तक में वाइब्रेशन होगा। चिप में लगा अलार्म बजने लगेगा। यह सब होते ही गेट पर तैनात गार्ड माजरा समझ जाएगा। ऐसे में या तो छात्र को किताब छोड़कर भागना पड़ेगा या पकड़ा जाएगा। लाइब्रेरियन डॉ. जमाल अहमद सिद्दकी के अनुसार पुस्तकों में चिप इंस्टॉल कराने का प्रपोजल भेजा जा चुका है। यूजीसी को भी इससे अवगत कराया गया है। जल्द ही इस नए सिस्टम को लेकर निर्णय हो जाएगा।

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