DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्वर्ग सिधारे व्यक्ति का होता रहा उपचार

एक व्यक्ति की बीमारी के चलते मौत हो गई। परिजनों ने पर्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन फिर भी उसका इलाज चलता रहा। पैथोलॉजी टेस्ट से लेकर डायलिसिस तक हुआ, चिकित्सक ने कई बार विजिट भी की और प्रिसक्रिप्शन भी लिखते रहे।

यह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि गाजियाबाद में सहकारिता विभाग के एडीओ की मौत के बाद मेडिकल क्लेम के लिए दाखिल कागजातों की जांच पड़ताल में चौकाने वाला तथ्य सामने आया। इस खुलासे से खलबली मची है। हालांकि सहकारिता विभाग लखनऊ ने मृतक के परिजनों से इस बारे में जवाब तलब किया है।

मामला सहकारिता विभाग गाजियाबाद के सेवानिवृत्त एडीओ केशोराम शर्मा से संबंधित है। जो ब्रह्मपुरी का रहने वाला है। बताते है कि उन्हें खाने की नली का कैंसर था। उनका पहले सुशीला जसवंत राय, सुभारती समेत अन्य अस्पतालों में इलाज कराया था। 15 सितंबर 08 को उनकी मौत हो गई थी। परिजनों ने मेडिकल क्लेम हासिल करने के लिए सहकारिता विभाग में फाइल दाखिल की थी। इसमें केशोराम शर्मा की मौत होने के बाद की तिथियों के बिल है।

जिनमें पैथोलोजी टेस्ट, डायलिसिस के साथ ही रूम चार्ज और डॉक्टर विजिट शामिल है। इससे साबित होता है कि केशो राम शर्मा की मौत के बाद भी उसका इलाज होता है। इसका खुलासा होने पर खलबली मची है। फिलहाल इस मामले में केशोराम के परिजन कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे है। गौरतलब है कि इन बिलों को वैरीफाई करके अपर निदेशक एवं प्रमुख अधीक्षक जिला चिकित्सायल ने कर रिपोर्ट जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां उ.प्र. गाजियाबाद को भेजी थी।

सूत्रों के मुताबिक सहकारिता विभाग लखनऊ ने पड़ताल में पकड़ लिया कि कुछ बिल केशोराम शर्मा के मरने के बाद की तिथि के है। इस पर केशोराम के परिजनों से पूछा गया है कि मामला धोखाधड़ी का बन रहा है, क्यों न इस मामले में कार्रवाई कर दी जाए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:स्वर्ग सिधारे व्यक्ति का होता रहा उपचार