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बिहार-झारखण्ड में नक्सलियों पर प्रहार की तैयारी

बिहार और झारखण्ड के सीमावर्ती इलाकों में गढ़ बनाए बैठे नक्सलियों के लिए आने वाला समय कठिन हो सकता है। झारखण्ड चुनाव के मद्देनजर दोनों राज्य की सरकारों की ही नहीं, बल्कि केन्द्र सरकार और देश भर की सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें इस इलाके पर जम गई हैं। चुनाव के दौरान दोनों ही राज्यों में मैचिंग-कांबिंग ऑपरेशन की तैयारी शुरू हो गयी है। इतना ही नहीं झारखण्ड से सटी बिहार और अन्य राज्यों की सीमाओं को सील कर एक साथ नक्सलियों के खिलाफ ज्वाइंट-ऑपरेशन की रणनीति बनाई जा रही है। 

झारखण्ड और बिहार की सीमाओं से जुड़े कई इलाके हैं जिन्हें नक्सलियों का लिबरेटेड जोन माना जाता है। बिहार के ऐसे सात हार्डकोर नक्सल प्रभावित जिले चिह्न्ति कर लिए गए हैं, जहां ऑपरेशन होना है। राज्य सरकार ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भी इसकी जानकारी दे दी है। कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई और बांका नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र में सबसे ऊपर माने जाते हैं। रोहतास जैसे इलाके में नक्सलियों का इस कदर दबदबा है कि बीते लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीएसएफ के कैम्प पर राकेट लांचर से हमला कर दिया था।

कहा जाता है कि ये ऐसे इलाके हैं, जहां की पहाड़ियों और घने जंगलों से होते हुए नक्सली झारखण्ड के अलावा अन्य राज्यों की सीमाओं में महज कुछ घंटे पैदल चल कर ही प्रवेश कर जाते हैं। झारखण्ड में चुनाव है और सुरक्षा एजेंसियों को ऐसी आशंका है कि नक्सली बड़े स्तर पर बिहार और झारखण्ड की सीमाओं में प्रवेश कर गड़बड़ी कर सकते हैं। बिहार और झारखण्ड में जिस तरह हथियारों का जखीरा बरामद हो रहा है, उससे यह आशंका और प्रबल हो गई है कि नक्सली पूरी तैयारी में हैं।

इधर पुलिस मुख्यालय का कहना है कि झारखण्ड के साथ-साथ बिहार में भी मैचिंग ऑपरेशन जरूरी है वर्ना, नक्सली इसका फायदा उठा सकते हैं। मुख्यालय ने इसके लिए केन्द्र से अतिरिक्त सुरक्षा बल की भी मांग की है। 

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