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विकलांग सर्टिफिकेट बनवाने को लेकर अस्पताल में हंगामा

विकलांग सर्टिफिकेट बनावे को लेकर जिला अस्पताल में लोगों ने हंगामा किया। लाइन में लगे लोगों ने आरोप लगाया कि सर्टिफिकेट जारी करने के लिए की जाने वाली जांच के लिए कर्मचारी सुविधा शुल्क की मांग करते हैं। जो शुल्क नहीं देता उसको लगातार चक्कर लगाने पड़ते हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में जिले में हर गुरूवार को विकलांग सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं। इस सर्टिफिकेट को बनाने के लिए जिला अस्पताल में विभिन्न प्रकार की जांच कराई जाती है। हर गुरूवार को करीब 60 से 70 सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। गुरूवार को इस सर्टिफिकेट को जारी कराने के लिए सुबह से भी भीड़ रहती है। पहले मरीजों की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर एक्स-रे भी कराना पड़ता है।

इस पूरी जांच प्रक्रिया में तीन से चार घंटे लग जाते हैं। गुरूवार को भी इस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए लोग सुबह से ही लाइन में लगे रहे। कई लोगों ने आरोप लगाया कि बीमारी के पुराने रिकार्ड चेक करने के नाम पर लोगों को परेशान किया जाता है। यदि कर्मचारियों को सुविधा शुल्क नहीं दिया तो सर्टिफिकेट के लिए कई हफ्ते चक्कर काटने पड़ जाते हैं। सर्टिफिकेट बनाने आए रामकिशन के मुताबिक उनका दो साल पहले एक्सीडेंट हुआ था। जिसमें उनके सीधे पैर में थोड़ी दिक्कत आ गई। इसकी वजह से वह ठीक प्रकार नहीं चल पाते। जब विकलांग सर्टिफिकेट बनवाने के लिए अस्पताल पहुंचे तो उन्हे मना कर दिया गया। बाद में उनसे पैसे की मांग की गई।

इस संबंध में सीएमओ डा.एके धवन का कहना है कि इस सर्टिफिकेट को जारी करने में कई प्रकार की जांच की जाती है। सही व्यक्ति को ही सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। उनके मुताबिक हर सप्ताह 100 से अधिक आवेदन किए जाते हैं। इनमे से 20 से 25 फीसदी के आवेदन रद्द कर दिए जाते हैं। तो पांस से दस फीसदी लोगों के प्रमाण पत्र पूर्ण नहीं होते। जिन्हें अगले सप्ताह बुलाया जाता।

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