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विभाग खुद बन सकता है इसका शिकार

जिलेवासियों को स्वाइन फ्लू से बचाव का पाठ पढ़ाने वाला स्वास्थ्य विभाग खुद ही आम लोगों को एच1 एन1 इंफ्लुयंजा की गिरफ्त में जकड़ सकता है। हैरानी की बात है कि सामान्य अस्पताल में एक विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ दिन पहले स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गए। बावजूद इसके बिना कोई एहतियात बरते, डॉक्टर ओपीडी में सैकड़ों मरीजों के इलाज में जुटे रहे। उधर, अब तक जिले में स्वाइन फ्लू पीड़ितों की संख्या 438 तक पहुंच गई है। जबकि एक व्यक्ति की इससे मौत भी हो चुकी है।


सामान्य अस्पताल में आने वाले मरीजों को डॉक्टरों से इलाज की बजाए मर्ज भी मिल सकता है। दरअसल, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद जिंदल को स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मरीज पाए जाने पर उनका सैंपल स्वाइन फ्लू की जांच के लिए एनआईसीडी लैब, दिल्ली भेजा गया था। वैसे स्वाइन फ्लू का पूरा-पूरा अंदेशा होने पर उन्हें टेमीफ्लू भी दे दी गई थी। लेकिन, अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन्हें छुट्टी नहीं दी गई। बल्कि स्वाइन फ्लू पीड़ित होने के बावजूद डॉक्टर ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज करते रहे। जबकि प्रदेश में सबसे अधिक गुड़गांव में स्वाइन फ्लू के मामले प्रकाश में आने पर विभाग का एक तर्क यह भी है कि लोग रोकथाम के उपाय नहीं अपना रहे हैं। उधर, डॉ. जिंदल के अनुसार उन्हें केवल दो दिन की छुट्टी दी गई थी। इसलिए पीड़ित होने  के बावजूद मरीजों को देखना उनकी मजबूरी थी।

19 दिन बाद आई रिपोर्ट
डॉ. जिंदल में स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलने पर 23 अक्टूबर को सैंपल एनआईसीडी भेजा गया था। लेकिन, उनके पॉजिटिव होने की रिपोर्ट 19 दिन बाद बुधवार को आई। जबकि वह ठीक हो चुके हैं। इससे पहले भी कई संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट एक महीने के अंतराल में आई हैं।

डॉक्टर के ठीक होने के बाद अधिकारी हुए जागरुक
पीएमओ डॉ. खजान सिंह से विभाग की इस लापरवाही के बारे में पूछा गया, लेकिन उन्हें डॉक्टर के स्वाइन फ्लू पीड़ित होने कोई जानकारी नहीं थी। इतना हीं नहीं, वे अब सावधानी बरतने की बात कहने लगे, जब डॉक्टर स्वस्थ हो चुके हैं।

एक अन्य डॉक्टर चपेट में
गुरुवार को डीएलएफ निवासी व निजी अस्पताल में कार्यरत एक अन्य डॉक्टर के स्वाइन फ्लू पीड़ित होने की पुष्टि हुई। इस मामले की पहचान विभाग ने निजी लैब के माध्यम से की है।

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