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औरंगाबाद: छाया रहेगा पानी का मसला

एक सवाल जो पिछले 35-40 सालों से हर चुनाव में उठता रहा है उसकी छाया इस बार भी चुनावों पर अवश्य पड़ेगी। यह सवाल है पानी का। जिले के नवीनगर, देव, कुटुम्बा, मदनपुर, औरंगाबाद, रफीगंज, गोह तथा हसपुरा प्रखंडों में खेती आज भी वर्षा पर आधारित है। इन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए बनी उत्तर कोयल तथा बटाने नहर परियोजनाएं पिछले 35 वर्षो से अधूरी पड़ी हैं।ड्ढr ड्ढr बिहार विभाजन के बाद यह समस्या और जटिल हो गई क्योंकि बराज और डूब क्षेत्र झारखंड में चला गया तथा सिंचित क्षेत्र बिहार में है। वर्षो चली जद्दोहद के बाद यह तय हुआ कि बराज का निर्माण झारखंड सरकार पूरा करगी जबकि पैसे बिहार सरकार के होंगे। लेकिन अभी तक बराज का निर्माण पूरा नहीं हुआ और न बराज में गेट ही लगा। नतीजतन जिले के 8-प्रखंड प्रतिवर्ष सूखे की चपेट में आते हैं। इसके अतिरिक्त बिजली और सड़कों की कमी भी मुख्य चुनावी मुद्दे होंगे। पिछले तीन वर्षो से औरंगाबाद जिला भीषण बिजली संकट का सामना कर रहा है। वैसे यहां नवीनगर प्रखंड में एनटीपीसी तथा भारतीय रलवे और एनटीपीसी तथा बिहार सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में दो बड़े बिजली घर प्रस्तावित हैं तथा इसके लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई भी चल रही है। इसके निर्माण का श्रेय लेना भी एक चुनावी मुद्दा रहा है और इस बार भी रहेगा।ड्ढr ड्ढr जहां तक सड़कों का सवाल है यह जिला बेहद अभागा है। जीटी रोड छोड़ कर जिले की तमाम सड़कें बदहाल हैं। एनएच-शिवगंज-रफीगंज-गोह सड़क, देव-देवमोड़ सड़क, देव-अम्बा रोड, नवीनगर-बारुण रोड, नवीनगर-माली-औरंगाबाद रोड, बेल-पौथू रोड, फेसर-पचरूखिया-औरंगाबाद रोड तमाम सड़कें बेहद बदहाल हैं। रफीगंज-शिवगंज रोड पर तो बदहाली के कारण इस वर्ष कई बार यात्री वाहन भी चलने बंद हो गए थे। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। परिसीमन से सुपौल की पहचान हुई पुख्ताड्ढr सुमन कुमार सिंह सुपौलड्ढr परिसीमन के बाद लोकसभा क्षेत्र बनने से सुपौल की पहचान बनी। अब विकास की राह भी आसान हो गयी है। परिसीमन से पूर्व सुपौल जिले का बड़ा हिस्सा सहरसा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत था। लेकिन लोकसभा क्षेत्र की आत्मा सुपौल में ही बसती थी। लोगों का मानना है कि सम्पूर्ण जिला सुपौल लोकसभा में शामिल हो जाने से जिले में विकास कार्य को पंख लग जाएगा। हालांकि सुपौल लोकसभा क्षेत्र से मधेपुरा जिला से विधान सभा क्षेत्र सिंहेश्वर (अ.जा.) भी जोड़ दिया गया है। जिससे राजनेताओं का राह थोड़ी कंटीली जरूर हो गई है। सुपौल के मिश्रीलाल का मानना है कि बदली हुई परिस्थिति में जातीय समीकरण में भी बदलाव आया है जो प्रत्याशी की परशानी का सबब बनेगा। त्रिवेणीगंज के सुरश कुमार को मलाल है कि त्रिवेणीगंज विधानसभा क्षेत्र को सुरक्षित क्षेत्र बना दिया गया है जो उचित नहीं लग रहा। वहीं छातापुर विधानसभा को सुरक्षित कोटे से अलग कर अररिया लोकसभा से सुपौल में मिलाये जाने पर छातापुर के मोहन कुमार, विवेकी दास एवं उपेन्द्र सिंह को काफी खुशी है।ं

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