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आलू की फसल को झुलसा-रोग से बचाएं किसान

उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग ने इन दिनों मौसम में आ रहे बदलावों के मद्देनजर किसानों को आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने की सलाह दी है।

राज्य के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशक हरिशंकर पाण्डेय ने बताया कि प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदाबांदी या नम वातावण में आलू की अगेती फसल में झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है। रोग के कारण आलू के उत्पादन पर बुरा असर पडता है।

उन्होंने आलू उत्पादकों को सलाह दी है कि आलू की अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने के लिए रक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाए और समय रहते हुए फसल को झुलसा रोग से बचाएं। झुलसा रोग आलू की निचली पत्तियों से प्रारम्भ होता है, जिसके फलस्वरुप गहरे भूरे झ्रकाले रंग के कुण्डलाकार छल्लेनुमा धब्बे बनते हैं जो बीच में सूखकर टूट जाते हैं।

पाण्डेय ने बताया कि यह रोग बडी तेजी से फैलता है और दो से चार दिनों के भीतर ही सम्पूर्ण फसल को नष्ट कर देता है। अधिक प्रकोप की दशा में इसके लक्षण तनों एवं कंदों पर भी गहरे भूरे रंग के धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। आलू की फसल को झुलसा रोगो से बचाने के लिए जिंक मैगनीज कार्बामेट 2 से 2.5 किग्रा 800-1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से (पहला रक्षात्मक छिड़काव बुवाई के 30-40 दिन बाद) अवश्य करें। आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के अंतराल पर दूसरा छिडकाव कापर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 से 3.0 किग्रा अथवा जिंक मैगनीज कार्बामेट 2.0 से2.5 किग्रा में से एक चयन कर (800-1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से) छिडकाव करना जरुरी है।

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  • Web Title:आलू की फसल को झुलसा-रोग से बचाएं किसान