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पेट संबंधी समस्याएं

सर्दी के मौसम में यदि अपने आहार पर समुचित ध्यान न दिया जाए तो पाचन प्रणाली संबंधी अनेक समस्याएं पैदा हो जाती हैं। कब्ज, एसिड, पेट का भारीपन, भूख अधिक लगना या बिल्कुल न लगना और जी मिचलाना जैसी समस्याएं तो इस मौसम में सामान्यत: सभी को कभी-कभार अपना शिकार बना लेती हैं। निम्न यौगिक क्रियाओं के अभ्यास से इन समस्याओं से बचा जा सकता है।
आसन : पवनमुक्तासन, धनुरासन, वज्रासन, जानुशिरासन, सुप्त वज्रासन, भुजंगासन, सर्वागासन तथा मेरुवक्रासन पाचन प्रणाली को सशक्त, क्रियाशील एवं स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। यहां पवन मुक्तासन के अभ्यास की विधि प्रस्तुत है-
पीठ के बल जमीन पर लेटें। बाएं पैर को मोड़कर दोनों हाथों की हथेलियों से पकड़कर छाती की ओर खीचें। फिर यथासंभव स्थिति में आएं। यही क्रिया दाएं पैर से तथा दोनों पैरों को एक साथ जोड़कर भी करें। प्रारम्भ में इसकी दो आवृत्तियों का अभ्यास करें। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ाकर 5 से 7 तक कीजिए।
प्राणायाम : पाचन संबंधी रोगों को दूर करने के लिए कपालभाति, भस्त्रिका तथा नाड़ीशोधन, प्राणायाम बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं। योग्य मार्गदर्शन में प्रतिदिन 15 से 20 मिनट तक इनका अभ्यास करना चाहिए।

योगनिद्रा एवं ध्यान : मानसिक तनाव, द्वंद्व तथा भावनात्मक असंतुलन आदि पाचन अंगों को अस्वस्थ बनाते हैं। योगनिद्रा एवं ध्यान के अभ्यास से भावनात्मक शिथिलीकरण उत्पन्न होता है जिससे पाचन संबंधी सभी अंग तथा शरीर के अन्य सारे अंग सशक्त होते हैं।
आहार : पर्याप्त मात्र में फल, सब्जी, सलाद तथा अंकुरित अनाज लें। सूखे मेवे तथा अंजीर और आलू बुखारे का सेवन करें। गरिष्ठ तथा मैदे से बने खाद्य पदार्थ का सेवन कम करें।
विशेष: भोजन के पश्चात् वज्रासन में थोड़ी देर बैठना चाहिए।

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