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मराठीवाद का इतिहास

उग्र मराठीवाद बाल ठाकरे ने शुरू किया था, इसलिए नहीं कि उनके मन में मराठी संस्कृति और पहचान को लेकर कोई विचार आया था, बल्कि इसलिए कि वे बवाल करने वाले आदमी थे और उन्हें कोई मुद्दा चाहिए था। तब अगर उनकी सब्जी में नमक ज्यादा पड़ जाता तो वे नमक विरोधी आंदोलन चला सकते थे। बारिश से भीग गए होते तो बारिश विरोधी आंदोलन चला देते। संयोग था कि उनकी नज़रों में कुछ दक्षिण भारतीय क्लर्क, टाइपिस्ट वगैरा पड़ गए तो उनके खिलाफ आंदोलन चला दिया। उनकी समझ उस वक्त जितनी थी, उतनी ही आज भी है और राज ठाकरे की भी उससे ज्यादा नहीं है, कम भले ही हो। पंजाबी, गुजराती, मारवाड़ियों से उन्हें कोई समस्या नहीं थी। ये आमतौर पर अमीर थे और इनसे पंगा लेने में पिटने का डर था और पंगा न लेने के कई फायदे थे।
इस तरह शिवसेना निम्न मध्यमवर्गीय दक्षिण भारतीयों के खिलाफ मारपीट करते हुए खड़ी हुई और मुंबई में उन्होंने उगाही का एक व्यवस्थित उद्योग खड़ा किया। कांग्रेस ने उनकी मदद की, क्योंकि वह जमाना शराफत का था, नेता नेतागिरी करते थे और गुंडे गुंडागर्दी। नेता खुद गुंडागर्दी नहीं करते थे, वे गुंडों को आउटसोर्स करते थे और गुंडे मारपीट, लूट-पाट करके खुश रहते थे, उनका इरादा विधानसभा और संसद में जाने का नहीं होता था। कांग्रेस ने अपने विरोधी कम्युनिस्टों, समाजवादियों आदि को पिटवाने में शिवसेना की मदद ली, उसके बदले दक्षिण भारतीयों को पीटने और बाकियों से वसूली की उसे इजाजत दी। लगभग 20 साल यह गठबंधन चला, इस बीच शिवसेना की गुंडागर्दी तो जारी रही, लेकिन मराठियों का मन उससे उचट गया। शिवसेना के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया।

बाल ठाकरे धार्मिक व्यक्ति नहीं थे, लेकिन उन्होंने संघ परिवार के हिंदुत्व की व्यावसायिक संभावना को पहचाना और तब वे मराठीवाद छोड़ कर हिंदुत्व के साथ चले गए। हिंदुत्व के साथ शिवसेना की विध्वंसक विशेषज्ञता का अच्छा मेल बना। लगभग बीस साल तक शिवसेना ने हिंदुत्व के राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक तमाम लाभों का भरपूर दोहन किया। आगे जब इस दुकान की भी बिक्री घटने लगी तो राज ठाकरे ने एक नई दुकान खोली और फिर से मराठीवाद की एग्रेसिव मार्केटिंग शुरू की। मराठीवाद का अभी कोई मार्केट था नहीं, लेकिन कांग्रेस पुराने जमाने की तरह मनसे की मदद के लिए आई।
कभी बाल ठाकरे की मदद से कांग्रेस ने वामपंथियों को पीटा था और शिवसेना बाद में कांग्रेस के सिर पर सवार हो गई थी, अब शिवसेना को पीटने के लिए कांग्रेस ने राज ठाकरे को खड़ा किया है। इतिहास से सीखता कौन है?

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  • Web Title:मराठीवाद का इतिहास