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सचिन का नहीं है कोई जवाब

कोई शक नहीं कि सचिन एक महानतम खिलाड़ी है। मास्टर ब्लॉस्टर ने 19 हजार रन पूरे कर लिए। अभी तक इनके पास पहुंचने वाला विश्व का कोई अन्य खिलाड़ी नहीं है। चाहे सनथ जयसूर्या की बात करें या ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिंकी पॉन्टिग की। 45 शतक जड़ दिए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा शतक ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ हैं। सचिन लंबे समय से क्रिकेट में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते आ रहे हैं। सचिन में अभी भी काफी दम है। सचिन इतने रिकार्ड बना सकते हैं कि किसी का पहुंचना वहां तक संभव नहीं होगा।
चन्दन कुमार राय, जामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

एक बुराई और..
जैसे नेताओं ने, नेतागीरी को अपना खानदानी पेशा बना रखा है, वैसे सरकार (नेताओं) ने कुलीगीरी को खानदानी पेशा बना कर, देश में एक और ‘बुराई’ को जन्म दे दिया है।
बी. एस. डोगरा, सीमापुरी, दिल्ली

शिक्षित से अच्छे अशिक्षित
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में भले ही अशिक्षित लोग निवास करते हों, लेकिन चुनाव के समय गांव का मतदान प्रतिशत शहरों की अपेक्षा अधिक होता है। ये अशिक्षित लोग मतदान के प्रति जागरूक हैं, क्योंकि इन गरीब भोले-भाले लोगों के पास और कुछ नहीं होता देने के लिए सिवाय मतदान के। इसके बावजूद इन लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।
दीवान सिंह चौहान, लक्सर

वोट की भूख
कुछ यादगार दिनों में बड़े-बड़े नेता महान देशभक्तों की समाधि पर श्रद्धांजलि देने जरूर जाते हैं पर पूरे साल इन्हीं बड़े नेताओं द्वारा सत्य, अहिंसा व जनहित जैसी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। जगह-जगह महात्मागांधी, भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस जैसे रत्नों की मूर्तियां चारों ओर से कूड़े करकट से घिर जाती हैं, तब इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। क्या इन महान आत्माओं को इनकी जन्म व पुण्य तिथि पर ही याद किया जाना चाहिए?
अनुराग वर्मा, गाजियाबाद

तर्कहीन किराया वृद्धि
एक तरफ तो डीटीसी ने अनुचित ढंग से किराया वृद्धि की, ऊपर से सात रु. के टिकट के पन्द्रह रुपए वसूले जा रहे हैं। दस रु. के पन्द्रह रु. तो समझ में आते हैं, क्योंकि यह अधिकतम दूरी का किराया है, जबकि सात रु. केवल मध्यम दूरी का किराया है, जैसे मयूर विहार से अम्बेडकर स्टेडियम अथवा मयूर विहार से रमेश पार्क या बैंक एन्क्लेव। कृपया इसमें शीघ्र सुधार किया जाए।
असद अली, चांदपुरी, मयूर विहार, फेस-2

डाकघर की चमचमाती दीवारें
दिल्ली जीपीओ में गया तो देखा बिल्डिंग की सफेदी या पेन्ट बड़े सुन्दर ढंग से हुआ था। सभी काउंटर काले रंग के पत्थर व फर्श भी सुन्दर पत्थरों से चमचमा रहे थे। ऐसा ही सभी पोस्ट आफिसों को सजाए रखने से देश के व विदेश के लोग भी प्रभावित होंगे। यह प्रबंधकों का अच्छा कार्य है।
श्याम सुन्दर, संजय बस्ती, तिमारपुर, दिल्ली

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