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तुम बाहर से घेरो, हम अंदर से घेरेंगे

रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह ने किसानों से कहा कि तुम संसद को बहार से घेरो और हम अंदर सरकार को घेरेंगे। सरकार द्वारा एफआरपी पर लाया गया अध्यादेश किसी कीमत पर संसद में पारित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि यदि सरकार ने यूपी के किसानों को गन्ने की फसल के वाजिब दाम नहीं दिए तो वे गन्ने की फसल को हरियाणा में बेचेंगे।

दिल्ली रोड स्थित साउथ सिटी में महापंचायत में छोटे चौधरी ने कहा कि 9 नवंबर को किसानों के आंदोलन को देख सरकार और चीनी मिलें डर गई। इसलिए जल्द ही सरकार झुकेगी और किसानों को गन्ने का वाजिब दाम मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइज (एफआरपी) यदि लागू कर दिया तो किसानों को अपना गन्ना बेचना मुश्किल हो जाएगा।

गन्ने के अभाव में यूपी का किसान बर्बाद हो जाएगा। जबकि महाराष्ट्र के किसानों को अध्यादेश से कोई नुकसान नहीं होगा। इसलिए कृषि मंत्री शरद पंवार ने इस प्रकार का अध्यादेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि किसानों को जहां गन्ने का भाव ज्यादा मिलेगा, वहीं अपना गन्ना बेचेंगे। महापंचायत की अध्यक्षता करते हुए चौधरी यशपाल सिंह ने कहा कि, यह लड़ाई किसानों की नहीं है, बल्कि मजदूरों की भी है।

इससे पूर्व मीडियाकर्मियों से बातचीत में अजित सिंह ने केंद्र व राज्य सरकार के साथ ही न्यायपालिका पर भी टिप्पणी कर दी। बकौल छोटे चौधरी, गन्ने को लेकर ज्यूडीशियरी को न तो तकनीकी जानकारी है और न ही कोई संवैधानिक अधिकार। फिर भी वह मूल्य की लड़ाई का फैसला करती है।

मूल्य तय ही करना है तो अन्य चीजों का क्यों नहीं? गन्ने का ही क्यों? प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि एफआरपी व एसएपी के अंतर का भुगतान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन यहां मुख्यमंत्री मायावती को मूर्तियां बनवाने के लिए पैसा इकट्ठा करना मुश्किल हो रहा है, वह किसानों का रुपया देने से रही।

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