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कड़ा में मिला मध्यकालीन भैरव मंदिर

गुमनामी के अँधेरे में डूबे मध्यकाल के प्रचीन भैरव मंदिर को उत्साही युवाओं ने खोज निकाला है। गंगा की तराई में स्थित इस मंदिर में पुरातात्विक महत्व के कई ध्वंसावशेष भी मिले हैं। इसमें बजरंगबली की बेहद प्राचीन प्रतिमा भी मिली है। युवाओं की टीम अब इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए गाँव-गाँव घूम रही है। मध्यकालीन इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले कड़ा के अकबरपुर गाँव में सम्राट अकबर के खास सिपहसालार आसफ खाँ व ईरान के प्रसिद्ध संत गदा अली शाह बाबा के निवास से सम्बन्धित सबूत मिलते रहे हैं।

बताया जाता है कि कड़ा सूबे में रोज-रोज के विद्रोह से आजिज सम्राट अकबर ने आसफ खाँ को भेजा था। उसके मन में इस कदर वैराग्य पैदा हुआ कि वह अकबरपुर में आश्रम बनाकर रहने लगा। इसके सबूत अकबरपुर में आज भी मौजूद हैं। इसी ऐतिहासिक गाँव में गंगा की तराई में सैकड़ों साल प्राचीन भैरव मंदिर मिला है। हालाँकि अब वहाँ केवल टूटा-फूटा बरामदा भर शेष है।

मंदिर में बेहद प्राचीन व दुर्लभ हनुमान प्रतिमा भी मिली है। ग्रामीण इसका पूजन-अर्चन कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि मंदिर में मध्य काल की स्थापत्य कला के अवशेष साफ दिख रहे हैं। ऐसे कई टुकड़े मिले हैं जिनकी पच्चीकारी मनमोह लेती है। इन अवशेषों पर पुरातत्व विभाग की दिलचस्पी हो सकती है। अकबरपुर की 70 वर्षीया शांति देवी बताती हैं कि उन्होंने अपने पुरखों से मंदिर के बारे में सुन रखा था।

बताया जाता है कि इसमें एक बहुत सिद्ध नागा बाबा रहते थे। उनके पास मरीजों का ताँता लगा रहता था। बाबा की असमायिक मौत के बाद मंदिर गुमनाम सा हो गया। युवा टीम में रविमणी तिवारी, सूरजभान आदि कई शामिल हैं। ये युवा गाँव-गाँव घूमकर मंदिर के जीर्णाद्धार का प्रयास कर रहे हैं।

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