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बीस हजार का इनामी अरुण चौबे गिरफ्तार

नौ साल से पुलिस के लिए सिरदर्द बना अरुण चौबे आखिरकार गिरफ्त में आ गया। इलाहाबाद एसटीएफ टीम ने बुधवार को कुख्यात अरुण को जंक्शन रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ लिया। साथ में उसका भतीजा मुन्ना भी पकड़ा गया है। दोनों के पास से असलहे, मोबाइल और डायरी मिली है। अरुण दो लाख के इनामी कौशल चौबे का भाई है। चौबे गैंग में अरुण दूसरे नम्बर पर है। रीवा में कई पार्टनरों के साथ वह ठेकेदारी कर रहा था। अरुण और मुन्ना के पास मिली डायरी में एसटीएफ को उसके धंधे और गैंग मेम्बरों के बारे में सटीक जानकारी मिली है।

एसटीएफ टीम को खबर लगी कि बलिया का बीस हजार का इनामी अरुण चौबे रीवा से इलाहाबाद आ रहा है और बलिया के लिए ट्रेन पकड़ने वाला है। इसके बाद एसटीएफ टीम ने रेलवे स्टेशन के आसपास घेरेबंदी कर ली। अरुण अपने भतीजे संग जीआरपी गेट की तरफ बढ़ा तभी एसटीएफ टीम ने उसे पहचान कर दबोच लिया। दोनों को चादर डालकर पुलिस उन्हें खुल्दाबाद थाने ले गई। अरुण चैन छपरा थाना हल्दी बलिया के रहने वाले कमला कांत का बेटा है।

साथ पकड़ा गया भतीजा भी उसी गाँव में रहने वाले शैलेंद्र चौबे का लड़का है। गिरफ्तारी करने वाली एसटीएफ टीम में सत्य प्रकाश सिंह, अतुल सिंह, वेद प्रकाश राय, केपी राय, सिपाही भीम सिंह और अतुल सिंह शामिल हैं। अतुल सिंह के मुताबिक, कुख्यात अरुण पर सोलह से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2000 से पुलिस उसे तलाश रही थी। मुन्ना पर भी आठ मामले दर्ज हैं।

दोनों रींवा में दूसरे पार्टनरों संग मिलकर सड़क निर्माण, रेलवे के ठेके और प्रापर्टी की खरीद में लगे थे। अरुण का भाई कौशल गैंग का सरगना है। उस पर दो लाख का इनाम है। वह फरार चल रहा है। अरुण और मुन्ना के पास से दो तमंचे और भारी मात्र में कारतूस मिले हैं।

तीन मोबाइल और डायरी से पुलिस छानबीन कर रही है। अरुण ने वर्ष 2004 में बलिया पीडब्ल्यूडी परिसर में चार हत्याएँ कर सनसनी फैला दी थी। उसने राइफल से चार लोगों को भून दिया था। तभी से गैंग की कमान उसके हाथ चली गई थी।

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