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अखाड़ा परिषद का कोई औचित्य नहीं

अखाड़ा परिषद से बहिष्कृत किए गए तीनों अखाड़ों को लेकर बाबा हठयोगी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास भले व्यक्ति हैं, लेकिन उनके सहयोगी उन्हें गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने अपरोक्ष रूप से परिषद के महामंत्री का नाम लिए बिना ही उन पर व्यंग्य बाण छोड़े। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद में हिटलरशाही जैसा व्यवहार किया जा रहा है।

उत्तरी हरिद्वार के एक कांग्रेसी संत के आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बाबा हठयोगी ने कहा कि अखाड़ा परिषद का गठन चार संप्रदायों संन्यासी, वैष्णव, निर्मल और उदासीन को मिलाकर किया गया था। तीन अखाड़ों के बहिष्कार के बाद अब अखाड़ा परिषद में संन्यासी और वैष्णव संत ही रह गए हैं। ऐसी स्थिति में अखाड़ा परिषद का कोई औचित्य नहीं रह गया है।

दिंगंबर अणि अखाड़ों से हटाए गए छह संतों को लेकर उन्होंने कहा कि अभी लिखित रूप में कोई जानकारी उन्हें नहीं मिली है। उन्होंने कुंभ मेला को निवघ्न संपन्न कराने के लिए अखाड़ों की एकता पर बल देते हुए उम्मीद जताई कि अखाड़ों के बीच पुन: परस्पर सांमजस्य स्थापित हो जाएगा। इस अवसर पर महंत दुर्गादास, महंत रघुवीर दास, महंत भगवान दास आदि संत उपस्थित थे।

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