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अखाड़ों के बीच संघर्ष से सहमा मेलाधिष्ठान

देश के साधु संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद सीधे-सीधे दो गुटों में बंट गई है। अखाड़ा परिषद का विवाद मेलाधिष्ठान के अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। समय रहते यदि अखाड़ा परिषद के दोनों गुटों में समन्वय न बना, तो इसका सीधा असर कुंभ मेला के शाही स्नान पर्वो पर अखाड़ों के बीच संघर्ष के रूप में सामने आएगा।

देवबंद में योगगुरू रामदेव और वंदेमातरम् विवाद ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का विभाजन कर दिया है। अखाड़ा परिषद इस मुद्दे पर रामदेव को घेरना चाहती थी, लेकिन अखाड़ा परिषद से जुड़े कुछ अखाड़ा के प्रतिनिधियों की पहल ने इस विवाद को विराम दे दिया था, लेकिन आठ नवंबर को हरिद्वार महोत्सव के मंच पर आचार्य बालकृष्ण की उपस्थिति से यह विवाद गर्मा गया। यहां संतों के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई थी और बालकृष्ण मंच छोड़कर चले गए थे।

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के पक्ष को बड़ा अखाड़े के महंत राजेंद्र दास ने प्रमुखता से रखा था, लेकिन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास कुछ टिप्पणियों को लेकर खासे मर्माहत थे। नौ नवंबर को जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के आश्रम में अखाड़ों के प्रतिनिधियों के लगे जमावड़े से लगा था कि यह विवाद समाप्त हो गया, लेकिन दस नवंबर को अखाड़ा परिषद की बैठक में बड़ा अखाड़ा के महंत राजेंद्र दास, नया अखाड़ा के महंत धूनीदास और निर्मल अखाड़ा के महंत मित्रप्रकाश बैठक में नहीं पहुंचे।

11 नवंबर को बुलावे के बावजूद भी तीनों अखाड़ों के प्रतिनिधि बैठक में नहीं आए, तो अखाड़ा परिषद सीधे-सीधे दो गुटों में बंटी दिखाई दी। मेलाधिष्ठान के अधिकारियों की निगाहें पूरे दिन अखाड़ों की गतिविधियों पर लगी रहीं। पुलिस और प्राशासनिक अधिकारी दिनभर अखाड़ों की खाक छानते दिखाई दिए।

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