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अखाड़ा परिषद ने किया तीन अखाड़ों को बहिष्कृत

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक में तीन अखाड़ों के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को गंभीर अनुशानहीनता मानते हुए अखाड़ा परिषद ने तीनों अखाड़ों का परिषद से बहिष्कार कर दिया है। बहिष्कृत अखाड़े अखाड़ों के साथ शाही स्नान, गंगा स्नान, नहीं कर सकेंगे। वहीं प्राशासनिक बैठकों में भी अखाड़ा परिषद के साथ भाग नहीं ले सकेंगे। अखाड़ा परिषद ने तीनों अखाड़ों के धार्मिक आयोजनों और भोजन भंडारों में साधु संतों के शामिल होने पर भी रोक लगा दी है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित कर इसकी सूचना कुंभ मेलाधिकारी और मेला डीआईजी को लिखित रूप से भेज दी है। इसी के साथ मेलाधिष्ठान की अखाड़ा परिषद के साथ गुरूवार को होने वाली बैठक पर संकट गहरा गया है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने परिषद की बैठक 10 नवंबर को आहुत की थी। यह बैठक आनंद अखाड़ा के सचिव के आकस्मिक निधन के शोक प्रस्ताव के बाद स्थगित कर दी गई थी। इस बैठक में भी बहिष्कृत किए गए अखाड़ों के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे थे। बुधवार की प्रात: नौ बजे बैरागी कैंप स्थित महंत ज्ञानदास के आश्रम में आहुत बैठक में बड़ा अखाड़ा उदासीन, नया अखाड़ा उदासीन और निर्मल पंचायती अखाड़े का एक भी प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं हुआ।

आठ नवंबर को योगगुरू बाबा रामदेव के सखा आचार्य बालकृष्ण के हरिद्वार महोत्सव के मंच पर पहुंचने के बाद अखाड़ों के संतों में खींची तलवारों की छाया बुधवार की बैठक पड़ती दिखाई दी, तो परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि महाराज स्वयं तीनों अखाड़ों के प्रतिनिधियों को लेने के लिए अखाड़ों में पहुंचे, लेकिन बड़ा अखाड़ा के महंत राजेंद्र दास ने बैठक में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया।

इस सूचना पर परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास भड़क गए। ज्ञानदास ने कहा कि संगठन से बड़ा व्यक्ति नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि रामदेव और बालकृष्ण के प्रकरण को लेकर बैर पालना उचित नहीं है। बैठक में उपस्थित दस अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से तीनों अखाड़ों के बहिष्कार का ऐलान कर उनके शाही स्नान के साथ हुक्का-पानी बंद कर दिया है। इस निर्णय से मेलाधिष्ठान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बैठक में महंत त्रयंबक भारती, महंत रवींद्रपुरी, महंत प्रेमगिरि, महंत केशवदास, महंत धर्मदास, महंत रामविचलदास, महंत शिवशंकर गिरि उपस्थित थे।

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