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अपनों ने ही रोका डिंपल का रास्ता

जहाँ जीत सुनिश्चित थी भला वहाँ ऐसा क्या हो गया कि हार हाथ लगी वो भी एक बड़े अंतर से। आखिर छह महीने में ऐसा क्या हो गया कि फिरोजाबाद की जनता का साइकिल से मोहभंग हो गया और सिर्फ पंजे पर ही आस्था जग उठी। राजनीति के इस दंगल में हार सपा के अतिविश्वास की हुई है। बदले परिसीमन के राजनैतिक मानचित्र में देखें तो फिरोजाबाद यादव बाहुल्य के रूप में साफ दिख रहा था।

सपा भी इसे अभेद्य दुर्ग मान रही थी, छह माह पहले चुनावी नतीजों में सपा की विजय ने इसे साबित भी किया। आगरा की बाह, फतेहाबाद व खेरागढ़ के अलग होने के बाद इस सीट का हिस्सा जसराना, सिरसागंज और टूंडला विधानसभा क्षेत्र बन गए। इस उपचुनाव में सपा को सभी विधानसभा क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ा। जसराना यादव बहुल तो है ही सपा मुखिया की तमाम रिश्तेदारियां भी यहां हैं। उस पर भी मुलायम ने कल्याण सिंह का साथ पा लिया तो पार्टी को भरोसा हो गया कि अब यहां यादव और लोधियों का गठबंधन किसी को भी धूल चटा सकता है।

बदले समीकरण में ये हकीकत अब बदल चुकी थी। जसराना के वीरेंद्र लोधी की मानें तो सपा सरकार आते ही लोधियों की दुर्गति होती रही है। यानि सपा को इस चुनाव में यहाँ से घोर निराशा हाथ लगी। उधर, शिकोहाबाद तो ‘नेताजी’ की कर्मस्थली भी रही है। पढ़े भी यहां और पढ़ाया भी। पैतृक गांव इटौली भी यही है। प्रचार में उन्हीं रिश्तों का वास्ता देकर झोली भी फैलाई थी। पर यहां भी पार्टी के स्थानीय नेताओं के कर्म और अखिलेश यादव के इस्तीफे की नाराजगी आड़े आ गई। इसके अलावा शहरी मतदाता में बदलाव की बयार चली और पूरी सादगी और साजो-सामान के साथ आए कांग्रेस प्रत्याशी उन्हें भा गए।

शिकोहाबाद बस स्टैंड के निकट रहने वाले नारायण अग्रवाल का कहना है कि राजबब्बर आगरा में सांसद रहे। वहां उनकी छवि व्यापारी वर्ग के हितैषी की थी। ऐसे में उन्हें व्यापार जगत से जुड़े लोगों का भरपूर सहयोग मिला। नारायण की बात को इससे भी बल मिलता है कि शिकोहाबाद में पड़े करीब डेढ़ लाख वोटों में से कांग्रेस प्रत्याशी को 51 हजार से ज्यादा मत मिले।

सिरसागंज विधानसभा क्षेत्र को भी सपा अपना गढ़ मानती थी लेकिन यहाँ भी बब्बर की विकास पुरुष की छवि ने परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा दी। यही कारण है कि जीत का अंतर भी घटा। नगला गुलाल, बाछेमई, उरावर सहित दजर्नों यादव बहुल गांवों में इस बार ‘पंजे’ की घुसपैठ दिखाई दी। कभी सपा के क्षत्रप रहे पूर्व ब्लाक प्रमुख अजय यादव इस बार कांग्रेसी तिरंगा थामे मजबूती से लोहा लेते नजर आए। ऐसे में यादव बैल्ट में मतदान का ग्राफ बहुत ज्यादा नहीं बढ़ सका।

हाजीपुरा निवासी हाजी मुद्दन कहते हैं कि यूं तो मुसलिम चुनाव पूर्व ही जय हो का नारा लगाने लगे थे पर सांसद अजहरुद्दीन और सल्लू मियां ने इसे और धार दे दी। सपा महासचिव अमर सिंह की सलमान खान के खिलाफ दी गई टिप्पणी ने मुसलिम वोटों को पूरी तरह कांग्रेस की झोली में धकेल दिया।

बात टूंडला की करें तो यहाँ के मतदाताओं ने बब्बर को स्थानीय होने का पूरा लाभ दिया। यही नहीं ठाकुर बेल्ट ने भी उन्हें बसपा के विकल्प के रूप में स्वीकार किया। दरअसल यहां नारखी ब्लाक में आने वाली ठाकुरों की चालीसी बसपा प्रत्याशी एसपी सिंह बघेल के पुराने जलेसर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा रही है। वहां स्थानीय समीकरण ठाकुर बनाम बघेल के थे। कई ऐसे मौके आए जब यह दोनों जातियां आमने-सामने आईं और बघेल सजातीय लोगों की ढाल बने। ऐसे में ठाकुर बेल्ट ने बब्बर को बघेल का विकल्प माना।

कांग्रेस प्रत्याशी की आगरा के सांसद के रूप में विकास पुरुष की छवि भी जीत का हिस्सा बनी। टूंडला निवासी छात्र रोहित शर्मा कहते हैं कि एक ओर कीचड़ उछालने वाले थे और दूसरी ओर अपनी बात रखने वाले। वोटर को राहुल गांधी और राजबब्बर की सादगी भी रास आई।

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