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जमानत भी नहीं बचा पाईं पार्टियां

कभी उत्तर प्रदेश में राज करने वाली भारतीय जनता पार्टी को राज्य में संपन्न हुए उपचुनावों में करारा झटका लगा है और आलम यह है कि राज्य की एक लोकसभा और 11 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में पार्टी आठ सीटों पर जमानत गंवा बैठी है, जबकि केन्द्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने छह सीटों में अपनी जमानत गंवाई है।

प्रदेश की एक प्रमुख पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी की हालत भी कोई बहुत अच्छी नहीं है। राज्य की सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी ने उसे उसके ही गढ़ में उसे ध्वस्त कर दिया है और पार्टी फिरोजाबाद लोकसभा सीट एवं पांच विधानसभा सीट तो गंवा ही बैठी, उसके उम्मीदवार पांच सीटों पर अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए।

समाजवादी पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में पांच सीटें और फिरोजाबाद लोकसभा सीट जीती थी, मगर इस बार उसने सारी सीटें गंवा दीं। मजेदार बात यह है कि सपा उम्मीदवारों ने जिन पांच विधानसभा सीटों पर अपनी जमानत खोई है। उनमें संतकबीरनगर जिले की हैसर बाजार और सुल्तानपुर जिले की इसौली सीट भी शामिल है, जो पिछले विधानसभा चुनाव में उनके कब्जे में थी।

वर्ष 2007 में इसौली विधानसभा सीट पर सपा के टिकट पर चुनाव जीते चन्द्रभद्र सिंह ने बाद में बसपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी और उपचुनाव में यह सीट उन्होंने बसपा के खाते में डाल दी, जबकि सपा उम्मीदवार मणिभद्र सिंह 16939 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे और अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।

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