DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तुम सा नहीं देखा..

तुम सा नहीं देखा..

चाचा नेहरू, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आदि ऐसे नाम हैं, जिन्होंने तुम बच्चों से यही उम्मीद रखी कि तुम जीवन में हमेशा आगे बढ़ते रहने का पाठ पढ़ो और झूठ-फरेब से हमेशा दूर रहो। अपने स्वाभाविक गुणों को कभी खुद से दूर मत जाने दो।

ईमानदारी है तुम्हारा प्राकृतिक गुण
तुमने फिल्मों में देखा होगा कि चोर, लुटेरे, हत्यारों को कैसी-कैसी सजएं सुनाई जाती हैं। उन्हें अपनों से दूर कई वर्षो तक जेल में रहना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि एक ही दिन में वे बड़े चोर बन गए, बल्कि शुरुआत उन्होंने भी किसी छोटी चीजें चुराने से की होगी। अगर एक बार तुमने भी  ऐसा करना शुरू कर दिया तो वह बुरी आदत तुम्हें जीवन भर के लिए बीमारी की तरह अपनी चपेट में ले लेगी। और आज शायद जो तुमने इंजीनियर, डॉक्टर आदि बनने का सपना देखा है, तब हो सकता है उस लक्ष्य तक पहुंचना तुम्हारे लिए असंभव हो जाए।

मदद के हाथ बढ़ाते हो पहले
तुम्हें राह चलते अक्सर चौराहों पर मैले कपड़े पहने हुए कुछ बच्चे हाथ में लोहे का छल्ला लिए दिख जाते होंगे। वे लोगों को  तरह-तरह के करतबों से खुश करते नजर आते हैं। उन्हें फिक्र होती है एक-एक रुपया जोड़ कर अपने और अपने परिवार का पेट भरने की। बाल दिवस के मौके पर तुम खुद एन्जॉय करने के साथ-साथ ऐसे बच्चों के साथ भी खड़े रहने का गुण मत छोड़ना। दूर से देख कर अपनी खुशियां कहीं तलाशते इन बच्चों से हमेशा इसी तरह अपनापन जताते रहना। तुम अपने घर में पेरेंट्स को बताओ कि फलां चीजें तुम्हारे काम की नहीं, जसे आने वाले दिन सर्दियों के हैं तो कुछ गर्म कपड़े या फिर खिलौने, स्टेशनरी, बुक्स आदि। तुम ऐसे सामान को अपने हमउम्र गरीब बच्चों को दे सकते हो। इसके अलावा जो कोई भी तुम्हारे आड़े वक्त काम आए, उसका अहसान मत भूलना।

दोस्ती निभाने में नहीं तुम पीछे
अभिषेक और रिषभ की दोस्ती तब से है, जब उन दोनों का एडमिशन क्लास फस्र्ट में एक साथ हुआ। आज उनकी दोस्ती को 9 साल हो चुके हैं। बात पिछले ही साल की है, जब रिषभ की तबियत बहुत खराब होने के कारण वह कई दिन तक स्कूल नहीं जा सका, लेकिन अभिषेक जानता था कि रिषभ की पढ़ाई का बहुत नुकसान हो गया है, इसलिए ठीक होते ही अभिषेक ने रिषभ की पूरी मदद की और दोनों ही अच्छे माक्र्स के साथ अगली क्लासेज में आ गए। ऐसी होती है तुम्हारी दोस्ती।

तुम दोस्ती को निभाना खूब जनते हो, लेकिन कई दफा दोस्त बनाने में जल्दबाजी कर बैठते हो। तुम उसे दोस्त बनाओ, जो तुम्हारी खुशी के साथ-साथ परेशानी के समय भी तुम्हारा साथ देता है, भले ही उसमें कोई क्वालिटी न हो, मगर वह तुम्हें अपना मानता हो।

निश्छलता तुम्हारी
हमने एक दिन देखा कि एक नेत्रहीन व्यक्ति बार-बार सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था। हर बार भारी ट्रैफिक की वजह से वह कामयाब नहीं हो पा रहा था। करीब 12-13 वर्ष के लड़के  ने उस व्यक्ति का हाथ थाम कर उसे सड़क पार करा दी। उसने ऐसा किसी स्वार्थवश नहीं किया, बल्कि उसे लगा कि जरूरतमंद की मदद की जनी चाहिए। ऐसे ही होते हो तुम बच्चे। स्वार्थ से कोसों दूर। तुम कुछ बड़ों की तरह किसी नफे- नुकसान की परवाह नहीं करते। जिन लोगों ने तुमसे इतना प्यार किया, वह इसलिए कि उन्हें तुममें तुम्हारी निश्छलता नजर आई। बच्चों के लिए सभी समान होते हैं। अगर संभव हो तो तुम अपने इस गुण को संजो कर रखना। तुम किसी के लिए कभी कोई षड्यंत्र नहीं रचते। नकली खुशी का भाव भी तुम चेहरे पर नहीं ला पाते। शायद तुम बच्चों को भगवान का रूप भी इसलिए कहा जता है। तुम्हारा भोलापन ही होता है, जिसे देख कर किसी अजनबी के चेहरे पर मुस्कान खुद-ब-खुद बिखर जाती है।  

बच्चे मन के सच्चे
अक्षत से सभी कहते हैं कि तुम जब भी झूठ बोलने की कोशिश करते हो, पकड़े जाते हो। हां, ये बात सच है। तुम बच्चे प्राय: सच का साथ देते हो। तुम्हारे झूठ भी तुम्हारी ही तरह बहुत छोटे होते हैं। अगर ऐसा कोई मौका आता है कि किसी छोटे से झूठ से किसी की भलाई होती है तो उसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन बेवजह झूठ बोलने की आदत कभी मत बनाओ। एक बार अगर तुमने झूठ बोलने की आदत अपना ली तो पूरी जिंदगी इससे पीछा नहीं छुड़ा पाओगे। कभी जब तुम कोई बात अपने माता-पिता से झूठ बोल जते हो तो तुम्हें हर वक्त यही चिंता सताती रहती है कि कहीं पता चल गया तो क्या होगा। एक बार बोला गया झूठ तुम्हारा कहीं भी मन नहीं लगने देता। खेलते, पढ़ते हुए तुम्हें भय हमेशा सताता रहता है, जबकि उसके उलट अपनों से सच-सच कहने के बाद तुम एकदम निश्चिंत रहते हो।

क्रिएटिविटी की उड़ान बनी रहे
आर्ट वर्क, प्रोजेक्ट वर्क, क्राफ्ट, स्टोरी राइटिंग, क्रिएटिव राइटिंग, स्कल्पचर मेकिंग, स्लोगन राइटिंग, पोस्टर मेकिंग, कोलाज मेकिंग आदि ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां तुम अपना हुनर दिखाते हो। अपने आइडियाज के दम पर तुमने देश और दुनिया में नाम कमाया।  ‘क्रिएटिव वर्क’ तुम्हारे अंदर छिपे हुनर को बाहर निकालता है। कला को लगातार अभ्यास ने निखारने का काम किया। कभी जल्दी में कभी सबसे बेहतर काम की चाह में क्रिएटिव काम दूसरे से मत करवाना। दूसरे के किए गए काम से अगर तुम अच्छा  ग्रेड्स पा भी लेते हो तो तुम्हारी रचनात्मक क्षमता दब कर रह जाएगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:तुम सा नहीं देखा..