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दो टूक (11 नवम्बर, 2009)

इस रियायत पर कोई हंसे या रोए! आलोचना की आंधी झेलती दिल्ली सरकार ने एक आम मध्यवर्गीय दिल्लीवासी को महज इतनी राहत दी कि वह पांच रुपये में तीन की जगह चार किलोमीटर सफर कर सकेगा! लेकिन भाई, पब्लिक का गुस्सा क्या सिर्फ एक किलोमीटर की रियायत के लिए था? क्या इतने भर से उसके आंसू पुंछ जाएंगे?

समस्या की जड़ में यह गलतफहमी है कि गरीब सिर्फ वह है जिसके पास बीपीएल कार्ड है। हर सफर से पहले दो-दो रुपये का बजट बनाने वाले पेंशनर, विधवाएं, पेट काट-काट कर बच्चों को पढ़ा रहे मां-बाप, जेबखर्च और किराए के बीच मुश्किल से संतुलन बिठाते बच्चे - ऐसी न जाने कितनी श्रेणियों के नागरिक हैं जो बीपीएल कार्डधारक न होने के बावजूद बहुत विवश हैं, साधन सीमित हैं। उन सबके लिए यह रियायत बेमानी है, बेमतलब है।

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  • Web Title:दो टूक (11 नवम्बर, 2009)