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कुछ नहीं छिपा सकेंगे विवि और कॉलेज

विश्वविद्यालयों, कॉलेजों के लिए अब सूचनाओं को छिपाना संभव नहीं होगा। इन सभी संस्थाओं को कमेटियों की संस्तुतियों, बजट के खर्च, सभी महत्त्वपूर्ण फैसलों को वेबसाइट पर उपलब्ध कराने और अपनी वेबसाइट को यूजीसी के साथ लिंक करने को कहा गया है।

प्रदेश के 19 विश्वविद्यालयों और 250 से अधिक डिग्री कॉलेजों/संस्थानों से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातों, निर्णयों आदि के बारे अपेक्षित जानकारी तुरंत हासिल करना बेहद मुश्किल काम है। आरटीआई के तहत सूचना लेने में भी एक महीने का वक्त लग सकता है। लेकिन, अब केंद्र के ताजा निर्देश के बाद यह जानना काफी आसान होगा कि किस संस्था में क्या कुछ हुआ है या हो रहा है।

केंद्र के निर्देश क्रम में यूजीसी अपने सभी महत्वपूर्ण फैसलों, कमेटियों के गठन, उनके निर्णयों, कोर्ट से जुड़े मामलों-विवादों, विश्वविद्यालयों-कॉलेजों की जांच रिपोर्ट, कार्रवाई की संस्तुति, बजट का ब्योरा, बजट खर्च में धांधली और मान्यता देने-समाप्त करने आदि की सभी जानकारी एक क्लिक की दूरी पर होंगी। इसी प्रकार विवि और कॉलेजों को आर्थिक स्थिति, संसाधनों, प्रवेश-प्रक्रिया, शिक्षकों की उपलब्धता, उपाधियों-पाठय़क्रमों का ब्योरा जारी होगा।

इन संस्थाओं को कितनी ग्रांट मिली है, कितनी फीस ली गई और कितने स्थानों पर कॉलेजों या स्टडी सेंटरों को अनुमति दी गई है, का ब्योरा भी वेबसाइट पर दिया जाएगा। इन सभी वेबसाइटों को यूजीसी की वेबसाइट से लिंक किया जाएगा। इसी वर्ष के आखिर तक सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के बारे में यूजीसी की वेबसाइट के जरिये जानकारी हासिल की जा सकेगी।

उत्तराखंड में अभी आठ विश्वविद्यालयों और 150 से अधिक कॉलेजों को  अपनी वेबसाइट बनवानी होगी क्योंकि ये संस्थाएं अब भी करीब  दो दशक पुराने दौर में संचालित हो रही हैं। एमएचआरडी के  संयुक्त सचिव सुनील कुमार के अनुसार, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता तय करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

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