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नेपाल में यज्ञ के लिए भारत में रखा व्रत

नेपाल में हो रहे यज्ञ के लिए भारत में व्रत रखा जाए, सुनने में भले ही अटपटा लगे पर यह सच है। सोमवार को नेपाल के डडेलधुरा जिले के एक मंदिर में हुई पूर्णाहुति के लिए भारत के चम्पावत जिले के मंच तामली क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने व्रत रखा। देर शाम वहां यज्ञ सम्पन्न होने की सूचना मिलने के बाद श्रद्धालुओं ने व्रत तोड़ा।

12 साल बाद होने वाले इस विशेष यज्ञ में भाग लेने के लिए चंपावत के अलावा कुमाऊं से कई अन्य क्षेत्रों के लोग नेपाल गए हुए थे। गांव वालों की मान्यता है कि, मंच तामली के ठीक सामने नेपाल की तरफ ऊंचे पहाड़ पर स्थित इस मंदिर की पूर्णाहुति का धुआं यहां गांव से दिखाई पड़ता था।  पर्यावरण में आए बदलाव से यज्ञ का धुआं भारत से नहीं दिखाई पड़ता। इसलिए सोमवार को नेपाल पहुंचे एक श्रद्धालु ने फोन से यज्ञ सम्पन्न हो जाने की सूचना अपने गांव को दी।

काठमांडू से प्रकाशित होने वाले नेपाली भाषा के दैनिक ‘कांतिपुर’ ने भारत तथा नेपाल के सीमान्त क्षेत्र की साङी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाली इस विशिष्ट ‘जात्र’ को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। समाचार पत्र ने कहा है कि, डडेलधुरा जिले में चिपुर गांव के झाली टाकुरी पहाड़ी पर आयोजित इस जात्र में डडेलधुरा, बैतड़ी, डोटी के अलावा मंच तामली क्षेत्र के लोग शामिल होते हैं।

लाखों की संख्या में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भागेश्वर देवता की पूजा करने के बाद एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित देवी के मंदिर में हजारों कुंतल घी, जौ और तिल से यज्ञ करते हैं। कुमाऊं से जात्र में पहुंचे एक श्रद्धालु नरेन्द्र जोशी के हवाले से ‘कांतिपुर’ ने कहा है कि, यज्ञ की लपटें या धुआं देख कर भारत में पड़ने वाले उनके क्षेत्र के लोग जात्र के लिए रखा गया व्रत तोड़ते हैं।

बताया जाता है कि ऐसा क्षेत्र और परिवार की सम्पन्नता, रोगों का नाश और संतान सुख की कामना के लिए किया जाता है। मंदिर के पुजारी श्यामराज चटौत के हवाले से समाचार पत्र ने कहा है कि, यह जात्र हर 12वें साल आयोजित की जाती है लेकिन क्षेत्र में माओवादियों की गतिविधियां बढ़ने के बाद पिछली बार यह आयोजित नहीं की जा सकी थी। क्षेत्र में शांति के बाद 22वें वर्ष में जात्र आयोजित की गई। 

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