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उपचुनावों का संदेश

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने जीत का जो सिलसिला शुरू किया था वह इन उपचुनावों में भी बरकरार रहा है। यह बात केरल और बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक के मतदाताओं ने साबित किया है। उत्तर प्रदेश में भले ज्यादातर विधानसभा सीटों पर कब्जा जमा कर सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी लोकसभा में लगे झटके से उबरती दिख रही है, लेकिन फिरोजाबाद की लोकसभा सीट और लखनऊ पश्चिम विधानसभा सीट जीत कर कांग्रेस ने अपनी बहाली की उम्मीद बरकरार रखी है।

इस जीत के पीछे राहुल गांधी के बढ़ते करिश्मे का असर देखा जा सकता है। फिरोजाबाद लोकसभा सीट मुलायम सिंह यादव के उत्तराधिकारी अखिलेश यादव ने खाली कर वहां से अपनी पत्नी को उम्मीदवार बनाया था। जनता ने वहां से समाजवादी पृष्ठभूमि से आए अभिनेता और कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर को जिता कर यह बता दिया है कि राजनीतिक क्षेत्र उपहार में दी जाने वाली घरेलू वस्तु नहीं है। जनता परिवारवाद को एक सीमा से ज्यादा स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

आज यूपी में समाजवादी पार्टी जिस प्रकार कमजोर हुई है और भाजपा का सूपड़ा साफ हुआ है उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि अब वहां लड़ाई कांग्रेस और बसपा के बीच में होनी है। केरल में कांग्रेस ने सिर्फ तीन विधानसभा सीटें ही नहीं जीती हैं बल्कि कन्नूर सीट से माकपा के पूर्व सांसद और हाल ही में पार्टी छोड़ कर  कांग्रेस  में शामिल हुए अब्दुल्ला कुट्टी को जितवा कर माकपा को कड़ी चुनौती भी दी है। कांग्रेस का यह हौसला पहले से गुटबाजी में फंसी माकपा को आशंकित करने वाला है। लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस ने मिलकर वाममोर्चा को निराशा के कोपभवन में जाने और पार्टी नेताओं को हार मानने व रणनीतियों की  समीक्षा करने को मजबूर कर दिया है। हालांकि पश्चिम बंगाल की जिन दस सीटों पर विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें से वाममोर्चा के पास तीन ही सीटें थीं। अगर उसने तीनों सीटें गंवाई हैं तो कांग्रेस से एक सीट छीनी भी है।
 
इससे यह जरूर पता चलता है कि लेफ्ट के पतन का सिलसिला रुक नहीं रहा है। इससे माकपा के भीतर खींचतान और बेचैनी बढ़ने की आशंकाएं हैं। वहीं राज्य की सत्ता मिलने की उम्मीद से तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस का गठबंधन मजबूती ग्रहण कर सकता है। स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल और केरल में यूपीए विधानसभा चुनाव तक जीत के सिलसिले के बारे में आश्वस्त हो सकती है, जबकि उत्तर प्रदेश में कड़ी मेहनत की चुनौती है।

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