DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हाथी सब पर भारी, साइकिल को नहीं मिली सवारी

हाथी सब पर भारी, साइकिल को नहीं मिली सवारी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 11 और लोकसभा की एक सीट के लिए हुए उपचुनाव में सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा की नौ सीटों पर कब्जा करके जहां एक ओर कानून एवं व्यवस्था से लेकर सार्वजनिक खजाने के दुरूपयोग के बारे में विपक्षी दलों के हमलो को भोथरा साबित कर दिया है वहीं केंद्र में सरकार चला रही कांग्रेस पार्टी भी विधान सभा की एक और फिरोजाबाद की लोकसभा सीट को जीत कर अपनी पुर्नवापसी के संकेतो को जिलाए रखने में कामयाब रही है।

एक भी सीट जीतने में असफल्‍ा रही समाजवादी पार्टी को अपने राजनीतिक जीवन की सबसे शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा जबकि भाजपा अपनी परम्परागत सीट पश्चिम लखनऊ भी गंवा बैठी है। विधानसभा की जिन 11 सीटो के लिए उपचुनाव हुए हैं उनमें वर्ष 2007 में हुए चुनावों में उनमें बसपा को केवल ललितपुर सीट पर ही जीत मिली थी। उसने इस उपचुनाव में ललितपुर सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा जबकि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के गृह जनपद इटावा की दो सीटों इटावा सदर और भरथना को छीन कर उसने सपा को उसके गढ़ में ही तारें दिखा दिया। साथ ही शाहजहांपुर की पुवायां, सुल्तानपुर की इसौली और संत कबीर नगर जिले की हैंसर बाजार सीटें भी बसपा ने सपा से हथिया ली।

बसपा ने जौनपुर जिले की रारी सीट जनता दल यू तथा कुशीनगर जिले की पडरौना विधान सभा सीट कांग्रेस से छीनी है। बसपा ने झांसी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार को नौ वोटो के मामूली अन्तर से हराकर यह सीट कांग्रेस से छीन ली। विधानसभा की 11 में से नौ सीटें जीतकर बसपा ने 403 सदस्यीय विधान सभा में अपनी सदस्य संख्या को 218 से 227 पर पहुंचा दिया है।

समाजवादी पार्टी के लिए सात नवम्बर को हुए यह चुनाव राजनीतिक जीवन की सबसे शर्मनाक हार के रूप में सामने आए हैं। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी को एक और करारा झटका फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर लगा है, जहां सपा के ही बागी सिने अभिनेता और कांग्रेस उम्मीदवार राजबब्बर ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू डिम्पल यादव को 85 हजार मतों से भी अधिक अन्तर से हरा दिया। फिरोजाबाद सीट सपा मुखिया यादव के पुत्र एवं पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई थी और समाजवादी पार्टी की परम्परागत सीट मानी जाती रही है।

फिरोजाबाद लोकसभा सीट के साथ ही कांग्रेस ने कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के संसदीय क्षेत्र रहे लखनऊ की लखनऊ पश्चिम विधानसभा सीट को जीत कर और हैंसर बाजार तथा पुवायां सीटो पर दूसरे स्थान पर रहकर प्रदेश में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की है। लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों में जीती पड़रौना और झांसी विधानसभा की सीटें कांग्रेस ने गंवा दी हैं। गौरतलब है कि इन दोनों सीटों से दो केंद्रीय मंत्रियों आरपीएन सिंह और प्रदीप जैन आदित्य की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई थी ओर इन दोनों के लोकसभा सदस्य बन जाने के कारण यह सीट खाली हुई थी।

पड़रौना में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी सपा के शाकिर अली को 53 हजार से अधिक मतों से पराजित किया जबकि केन्द्रीय भूतल परिवहन राज्य मंत्री आऱपी़एऩसिंह की मां और कांग्रेसी उम्मीदवार मोहिनी देवी तीसरे स्थान पर रही। विधानसभा की जिन 11 सीटों के लिए उपचुनाव हुए उनमें से पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वाराणसी की कोलअसला और लखनऊ की लखनऊ पश्चिम सीटे ही जीती थीं। जिनमें से कोलअसला के विधायक अजय राय पहले ही भाजपा से नाता तोड़कर पिछले लोकसभा चुनाव में सपा की तरफ जा चुके थे और इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में फिर विजयी हुए हैं।

लखनऊ पश्चिम सीट से लगातार तीन बार जीते वरिष्ठ भाजपा नेता लालजी टंडन के लोकसभा के लिए चुन लिए जाने के बाद खाली हुई थी और उनके नजदीकी सूत्र बताते हैं कि वे वहां से अपने पुत्र आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल जी को चुनाव लड़ाना चाहते थे मगर पार्टी द्वारा अमित पुरी को टिकट दे दिये जाने से नाराज थे। बहरहाल टिकट आवंटन को लेकर पार्टी के भीतर चले द्वन्द्व के बीच अमित पुरी कांग्रेस के श्याम किशोर शुक्ल के मुकाबले दो हजार से कुछ अधिक के अन्तर से चुनाव हार गए और इस सीट पर भाजपा का 20 वर्षो से रहा कब्जा टूट गया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हाथी सब पर भारी, साइकिल को नहीं मिली सवारी