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जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल से चिकित्सा व्यवस्था चरमराई

पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों के सोमवार की रात 12 बजे हड़ताल पर चले जाने बाद वहां की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। इसका सबसे ज्यादा असर इमरजेंसी पर पड़ा है। बताया गया कि बीते चौबीस घंटे में करीब 28 मरीजों की मौत हुई है।

हड़ताल की खबर मिलते ही मरीजों का पलायन भी शुरू हो गया है। इमरजेंसी में फिलहाल मरीज तो हैं, लेकिन रोज की तरह उनका इलाज करने वाले चिकित्सक नहीं है। जो मरीज वेंटीलेशन पर हैं उनके परिवार वाले भी कंट्रोल रूम में बैठे चिकित्सकों से पूछ रहे थे कि क्या वे अपने मरीज को यहां से ले जाए? उन्हें बताया जा रहा था कि जिस चिकित्सक के अंडर में मरीज हैं, उन्हीं से बातचीत कीजिए। वैसे कुछ मरीजों के परिवार वालों ने बताया कि उन्हें कहा जा रहा है कि यहां से कहीं और चले जाओ। यहां के चिकित्सक हड़ताल पर हैं। समस्तीपुर से आई महिला मरीज को अंदर ले जाया गया और कुछ देर बाद ही उसे अस्पताल से बाहर गेट के पास रख दिया गया। रोते-बिलखते उसके परिवार वाले महिला मरीज को दूसरी जगह इलाज के लिए ले गए।

मंगलवार को हड़ताल का पहला दिन था और अन्य दिनों के मुकाबले इमरजेंसी खाली-खाली नजर आ रहा था। बताया गया कि अधिकांश लोगों को हड़ताल के बारे में पता नहीं था। इस वजह से लोग पीएमसीएच चले आए थे। बुधवार से जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर दिखेगा। दूसरी ओर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि हड़ताल से निपटने के लिए एक सौ चिकित्सकों की मांग की गई है। अब तक 44 डॉक्टर पहुंच गए हैं और काम संभाल लिया है। फिलहाल इमरजेंसी को सुचारू रूप चलाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके बाद दूसरे विभागों में चिकित्सकों को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि मंगलवार को ओपीडी में 1436 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया गया, जबकि दोपहर तक इमरजेंसी में106 मरीज, बच्चा वार्ड में दस और स्त्री रोग विभाग में15 मरीज भर्ती किए गए। छोटे-बड़े 72 आपरेशन भी हुए। प्राथमिकता के आधार पर बाहर से बुलाए गए चिकित्सकों को तैनात किया जा रहा है। बुलाए गए सभी डॉक्टर आ जाएंगे तो मरीजों का इलाज करने में सहूलियत होगी।

वैसे डॉक्टर भी मानते हैंकि हड़ताल की वजह से मरीज वापस लौटने लगे हैं। वहीं जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के नेता डॉ. धनंजय का कहना है कि अभी तक उन लोगों से बातचीत करने के लिए पीएमसीएच प्रशासन से कोई आगे नहीं आया है। दूसरी तरफ समाजसेवी रेखा मोदी ने आरोप लगाया कि एक गेट से हमलोग मरीज भर्ती करा रहे हैं और अस्पताल प्रशासन दूसरे गेट से मरीज को बाहर निकाल दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या सीनियर डॉक्टर उनका इलाज नहीं कर सकते?

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