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रिलायंस ने कहा, पारिवारिक समझोता बेमतलब

रिलायंस ने कहा, पारिवारिक समझोता बेमतलब

मुकेश अंबानी की अगुआई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में दलील दी कि अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनी आरएनआरएल के साथ गैस आपूर्ति विवाद सुलझाने में अंबानी परिवार के बीच 2005 में हुआ पारिवारिक समझोता अप्रासांगिक है और इसके आधार पर इस मामले में कोई उचित व्यवस्था नहीं हो सकती।

इस बीच, आरएनआरएल ने मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्ण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष एक नया हलफनामा दायर किया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि गैस विवाद को लेकर अपना रुख बदल रही है।

इस चर्चित मामले में आगे की दलील देते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि चूंकि गैस की कीमत सरकार को तय करनी है ऐसे में दोनों पक्षों के बीच समुचित व्यवस्था करने के मामले में पारिवारिक समझोते का कोई मायने नहीं रह जाता।

इसके विपरीत आरएनआरएल के ताजा हलफनामे में इस मामले में सरकार की दखलदांजी पर आपत्ति जताई गई है और कहा गया है कि इस प्रकरण में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय का रवैया बेइमानी भरा व पक्षपाती है।

अनिल अंबानी की कंपनी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के इस रवैये को भी खारिज किया है कि केजी बेसिन के डी 6 खंड की गैस को 2.34 डालर प्रति यूनिट (एमएमबीटीयू) की दर से बेचना व्यावहारिक नहीं है। उल्लेखनीय है कि 2005 के पारिवारिक समझोते में दोनों पक्षों ने इसी दर पर समझोता किया था।

हलफनामे में केजी बेसिन परियोजना के विकास पर रिलायंस द्वारा दिखाए गए पूंजीगत खर्च पर भी सवालिया निशान लगाया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा गैस उत्पादन क्षमता को चार करोड़ घन मीटर से बढाकर आठ करोड़ घनमीटर दैनिक किए जाने के लिए सरकार ने पूंजीगत खर्च को 10,000 करोड़ रुपये से बढाकर 36,000 करोड़ रुपये दिखाए जाने को मंजूरी दी है।

आरएनआरएल ने कहा है कि यह खर्च उस प्रबंध समिति द्वारा मंजूर किया गया है जिसमें तात्कालिक हाइड्रोकार्बन महानिदेशक वीके सिब्बल भी शामिल थे। मंजूरी का यह मामला सीबीआई जांच के घेरे में है। हलफनामे में कहा गया है, जाहिर है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा बढ़ा चढ़ाकर दिखाए गए पूंजीगत खर्च के बावजूद गैस की लागत 1.28 डालर प्रति इकाई (एमएमबीटीयू) आएगी इस तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज 2.34 डालर प्रति इकाई के मूल्य पर जबरदस्त लाभ कमाने की स्थिति में होगी।

अनिल अंबानी की कंपनी ने कहा है कि बिजली व उर्वरक उद्योगों के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज की गैस की ऊंची कीमत चुकाना भारी पड़ेगा क्योंकि वे पहले से ही मंदी के दबाव में हैं। अनिल समूह का कहा है कि संवेदनशील उद्योगों को वाजिब कीमत पर गैस दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि अनिल समूह की कंपनी आरएनआरएल ने अदालत से अपील की है कि उसे 2005 के पारिवारिक सहमति पत्र के अनुसार रियायती दर पर गैस उपलब्ध कराई जाए जबकि सरकार ने केजी बेसिन की गैस के लिए प्रति यूनिट 4.2 डालर की कीमत तय की है।

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