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टैक्स के चक्कर में नपेगा डीएम का घर और दफ्तर

नगर निगम और जिला प्रशासन के बीच इस समय टैक्स-टैक्स खेला जा रहा है। इसे खेल इसलिए भी कहेंगे, क्योंकि दस साल में पहली बार नगर निगम को टैक्स वसूली का ध्यान आया है और पहली बार में ही डीएम के घर से लेकर दफ्तर और दूसरे सरकारी दफ्तरों पर करोड़ों का बकाया दिखा दिया है। ऐसा लंबा-चौड़ा बिल देखकर प्रशासन के होश उड़ गए हैं।

कहा जा रहा है कि नगर निगम ने टैक्स असिसमेंट सहीं तरह से किया ही नहीं। दरअसल, नगर निगम ने प्रशासन से हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और सीवर टैक्स के सिर्फ दो साल की अवधि के एक करोड़ 96 लाख रुपये जमा करने के लिए नोटिस दिया है। पैसा जमा नहीं होने पर अपर नगर आयुक्त ए.के. सिंह मंगलवार को तकादा करने के लिए अपनी टीम के साथ डीएम दफ्तर पहुंच भी गए। डीएम थे नहीं, उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मिश्र से पेमेंट जमा कराने को कहा।

सिटी मजिस्ट्रेट ने नगर निगम के टैक्स असिसमेंट पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि कोर्ट पर टैक्स लगाया नहीं जा सकता। फिर कलेक्ट्रेट के अंदर तो दफ्तरों से ज्यादा मजिस्ट्रेटों के कोर्ट हैं। निगम अफसरों का कहना था कि टैक्स में कोर्ट शामिल नहीं किए गए हैं। खाली एरिया भी छोड़ दिया गया है, फिर भी इतना टैक्स बना है। गतिरोध फिर भी कायम रहा। लंबी बहस के बाद इस बात पर सहमति बनी कि डीएम आवास से लेकर कलेक्ट्रेट, विकास भवन, जनसुविधा केन्द्र और सूचना कार्यालय के कवर्ड एरिया की फिर से नापतौल की जाए। निगम अफसर इस बात पर तैयार हो गए। अब देखना यह है कि टैक्स-टैक्स की आंख-मिचौली में फाइनल फैसला कितने पैसे पर आकर टिकता है। फिलहाल तो प्रशासन दो करोड़ की टेंशन में है ही।

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