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बिटिया की शादी पर महंगाई का असर

बिटिया की शादी पर महंगाई का असर

सिर चढ़ती महंगाई ने शादियों के मौसम पर भी असर डाल दिया है। जिन घरों में शादियां होने जा रही हैं, उनमें इन दिनों कम खर्च में शादी को बेहतर बनाने की जुगत लगाई जा रही है।
   
शादी वाले अधिकतर घरों में बेकाबू महंगाई की मार से बचने के लिए कई ऐसे छोटे-छोटे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिनसे शादी का खर्च निर्धारित बजट में भी रहे और जिंदगी में एक बार होने वाले समारोह को यादगार भी बनाया जा सके।
   
नोएडा निवासी अल्केश जैन ने बताया कि बेटी की शादी पर महंगाई के असर को कम करने के लिए उन्होंने शादी के समारोह को कम खर्चीला करने के उपाय के बारे में सोचा। शादी के लिए दो महीने पूर्व हमने जो बजट निर्धारित किया था, उसमें अब पूरी तैयारी के साथ समारोह करना संभव नहीं हो पा रहा था। सोने की खरीदारी से लेकर राशन तक का खर्च दो महीने में कई गुना बढ़ गया, इसलिए हमें समझौते करने पड़ रहे हैं।

जैन ने कहा कि एकमात्र तरीका यही निकला कि बेटी को दिए जाने वाले सामान में कटौती करने के बजाए शादी के समारोह के खर्चे में कमी लाएं। इसके चलते हमने साज-सज्जा से लेकर खान-पान तक की व्यवस्था में कटौती की है।

आगामी 29 नवंबर को अपनी बेटी की शादी करने जा रहे गुड़गांव निवासी पवन गुप्ता ने कहा कि बड़ी बेटी की शादी के रिसेप्शन के लिए हमने दो महीने पहले एक होटल में बुकिंग कराई थी। देखते ही देखते शादी का बजट हमारे निर्धारित बजट से कई गुना बढ़ गया। शादी के मुख्य समारोह के अलावा अन्य समारोहों में होने वाले खर्च के कारण हमें कई फैसले बदलने पड़े।

गुप्ता ने कहा कि अन्य खर्चों में कटौती करना संभव नहीं था, ऐसे में एकमात्र तरीका मेहमानों में कटौती करने का ही सूझा। अब बहुत चुनिंदा लोगों को आमंत्रण दे रहे हैं।

रोहिणी निवासी शासकीय कर्मी अलका गोखले ने अपनी बेटी की शादी में परिवारजनों को दिए जाने वाले उपहार के मामले में थोड़ा समझौता किया है। अलका कहती हैं बेटी की शादी अचानक तय हुई। ऐसे में जरूरत का ज्यादातर सामान हाथों-हाथ खरीदा। बेटी से जुड़े किसी सामान में कोई समझौता नहीं कर सकते थे, इसलिए परिवारजनों को शादी की खुशी में दिए जाने वाले उपहार के मामले में ही समझौता करना पड़ा।

कमोबेश इसी तरह का फैसला पश्चिम विहार निवासी आरके पुरी ने भी किया। पुरी ने बढ़ते खर्चों के चलते अपनी बहू को दिए जाने वाले सोने के आभूषणों में कटौती करने का कदम उठाया। पुरी बताते हैं कि समझ ही नहीं पा रहे थे कि कहां समझौता किया जाए। ऐसे में एकमात्र उपाय यही लगा कि अभी सोने के आभूषणों की खरीद को सीमित कर दिया जाए। इसके लिए हमने बहू के परिवार वालों से भी बात की और वे भी इस बात से सहमत हो गए कि सोने की खरीदारी को दाम कम होने तक के लिए छोड़ दिया जाए।

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