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मनु को पैरोल की सिफारिश पर शीला की आलोचना

मनु को पैरोल की सिफारिश पर शीला की आलोचना

जेसिका लाल हत्याकांड मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद उम्र कैद की सजा काट रहे मनु शर्मा को पैरोल पर छोड़ने की दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सिफारिश पर सोमवार को तब विवाद निर्मित हो गया जब विपक्षी दल भाजपा ने फैसले की आलोचना की और कानूनी विशेषज्ञों ने इस कदम के आधार पर सवाल खड़े किये।
   
बहरहाल, शीला ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इस बारे में कुछ भी गैऱ-कानूनी या असमान्य नहीं है और यह कानूनी दायरे के भीतर ही है।
   
अपनी मां की बीमारी के आधार पर दो महीने पहले रिहा किये गये 32 वर्षीय शर्मा को हाल ही में यहां एक होटल के नाइटक्लब में देखा गया लेकिन पुलिस की ओर से अभी इसकी पुष्टि होना बाकी है। उसकी मां को भी चंडीगढ़ में परिवार के एक होटल में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते देखा गया।
   
भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि शर्मा अपनी मां की बीमारी के गलत बहाने पर पैरोल पर है। इस पैरोल की सिफारिश दीक्षित द्वारा करना निंदनीय है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के दबाव में यह फैसला किया क्योंकि वह (मनु शर्मा) एक प्रभावशाली कांग्रेसी नेता का पुत्र है। जिस आधार पर पैरोल दिया गया।

उस पर सवाल उठाते हुए मल्होत्रा ने कहा कि शर्मा की मां को रविवार को चंडीगढ़ में संवाददाता सम्मेलन में संबोधित करते देखा गया, जबकि शर्मा को भी यहां एक होटल में देखा गया। भाजपा नेता ने मांग की कि उपराज्यपाल तेजिंदर खन्ना को शर्मा के पैरोल को तुरंत निरस्त कर देना चाहिये।
   
सुप्रीम कोर्ट की वकील कामिनी जायसवाल ने कहा कि पैरोल देने से पहले इसकी पुष्टि कर लेनी चाहिये थी क्या बीमार मां की देखभाल के लिये कोई भी नहीं है और क्या शर्मा की मौजूदगी बहुत ज्यादा जरूरी है।
   
उन्होंने कहा कि सबसे प्राथमिक चीज यह की जानी चाहिये कि अगर किसी व्यक्ति ने किसी आधार विशेष पर पैरोल मांगा है तो यह पता लगाया जाना चाहिये और इसकी पुष्टि करनी चाहिये कि क्या वह आधार मौजूद है।
   
शर्मा को पैरोल की सिफारिश करने के चलते आलोचनाओं के घेरे में आयीं शीला ने कहा कि इस बारे में कुछ भी गैऱ-कानूनी या असामान्य नहीं है क्योंकि पैरोल ऐसा है जिसे हर बंदी चाहता है और यह अगर वह इसकी मांग करता है तो इसमें कुछ भी गैऱ-कानूनी नहीं है।   

दिल्ली हाई कोर्ट में लंबी चली कानूनी लड़ाई हारने के बाद शर्मा तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा है। अदालत ने उसे सोशलाइट बीना रमानी के टेमेरिंड कोर्ट बार में 29 अप्रैल 1999 की रात मॉडल जेसिका लाल की बेहद नजदीक से गोली मार कर हत्या करने के मामले में दोषी करार दिया था।
   
शीला से जब यह पूछा गया कि किस आधार पर शर्मा को पैरोल की सिफारिश की गयी तो उन्होंने कहा, जो कुछ किया गया है, वह कानूनी दायरे के भीतर किया गया है। हर किसी (संबंधित एजेंसियों) से सुझाव लेने के बाद ही ऐसा (पेरोल की सिफारिश) किया गया है।

मीडिया से मुद्दे को तूल नहीं देने को कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी राय में पैरोल हर कैदी चाहता है। न तो उसके द्वारा इसकी मांग करने में कुछ गैऱ-कानूनी है और न ही कोई असमान्य बात है।
   
शीला ने कहा कि उन्होंने जेल तथा पुलिस प्रशासन की उन रिपोर्टों के आधार पर मनु को पैरोल की सिफारिश की जिनमें यह प्रमाणित किया गया था, हां, यह व्यक्ति पैरोल पा सकता है क्योंकि उसका बर्ताव अच्छा रहा है।

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  • Web Title:मनु को पैरोल की सिफारिश पर शीला की आलोचना