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थोक मंडियों में रहा सन्नाटा, फुटकर रहा गुलजार

वेस्ट यूपी में ‘चक्का जाम’ से थोक मंडियों में तो सुबह से लेकर शाम तक सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन फुटकर मंडियां पहले की तरह ही गुलजार रहीं। शहर की दो तिहाई मंडियों की दुकानें तो साप्ताहिक बंदी के कारण नहीं खुली। इससे शहर के अन्दर आवाजाही पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन बंदी की घोषणा का असर तिजोरी पर जरूर दिखा।  हर दुकानदार का एक ही जबाव था कि अन्य सोमवार की तरह कारोबार नहीं रहा। लोगों के मन में था कि आज बाजार बंद है, इसका असर स्पष्ट दिखा।

शहर का पहिया भले ही घूमता दिखा, लेकिन थोक मंडी केसरगंज, नवीन मंडी, हैण्डलूम का खंदक बाजार जैसी थोक मंडियों में चक्का जाम रहा। न कोई माल बाहर से आया और ही एक छटाक भर अनाज यहां से बाहर जा सका। गल्ला व्यवसायी आमोद गुप्ता ने कहा कि केसरगंज में हर रोज कम से कम दो सौ ट्रकों की आवाजाही होती है। पंजाब और दिल्ली की मंडियों से चावल, दाल व अन्य सामान यहां आते हैं। इतने की ही खपत भी होती है। इस मंडी में पचास करोड़ से अधिक का टर्न ओवर होता है। बाहर के लोगों को पूरी तरह से इसकी जानकारी नहीं होने के कारण हाईवे पर ही पचास से अधिक ट्रक खड़े रहे। उसी तरह से नवीन मंडी से भी खाद्यान्न के साथ ही फल और सब्जी की आपूर्ति नहीं हो सकी। है।  बुग्गी और छोटा हाथी (छोटा ट्रक) से पटा रहने वाले खंदकबाजार में केवल मोटरसाइकिल और रिक्शे चलते रहे। लेकिन थोक बाजार से निकलते ही सन्नाटा का अंत हो जा रहा था।

साप्ताहिक बंदी के कारण सर्राफा बाजार, वैली बाजार सहित विभिन्न मंडियों की दो तिहाई दुकानें ऐसे ही बंद थी । जो खुली रहतीं हैं वे पूरी तरह से खुली रही। हालांकि ग्राहकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। आर्या एलजी शो रूम के विपिन तेवतिया ने कहा कि बंदी के कारण ग्राहक पहले की तरह नहीं पहुंचे। सभी बैंक व अन्य संस्थान पूरी तरह से खुले रहे लेकिन आम दिनों के जैसी भीड़ नहीं दिखी।

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