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आठ घंटे ट्रेन में कैद रहीं कॉलेज की छात्राएं

सोफिया गर्ल्स कॉलेज की 95 छात्राएं की चार दिनों के  टूर पर की गईं और सोमवार को शालीमार एक्सप्रेस में आठ घंटे तक फंसी रहीं। इस एक्सप्रेस को महज 20 किलोमीटर के 20 से 25 मिनट के सफर में, पूरे नौ घंटे लगे। डरी-सहमी कुछ छात्राओं ने तो कोच में खिड़कियों के शटर डाल लिए। 

इधर, सिटी स्टेशन पर छात्राओं के परिजनों की आंखे इंतजार में पथरा रही थीं, ट्रेन में सवार बेटियों की चिंता उन्हें सता रही थी। वजह साफ थी कि खान-पान का सामान खत्म होता जा रहा था और ट्रेन के चलने को लेकर वह नाउम्मीद होती जा रही थी। इस दौरान हालांकि स्कूल प्रधानाचार्या, अध्यापिकाएं कोच में ही छात्राओं के साथ रहीं, लेकिन सुरक्षा का भाव उनमें तब जगा तब आरपीएफ ने छात्राओं वाले कोच को सुरक्षा घेरे में ले लिया।

कॉलेज प्रधानाचार्य सिस्टर गेल 95 छात्राओं के दल के साथ पांच नवंबर को डलहौजी टूर पर गई थीं। सोमवार सुबह उन्हें शालीमार एक्सप्रेस से 8:50 बजे सिटी स्टेशन पर पहुंचना था। किसान आंदोलन के कारण इस ट्रेन को करीब साढ़े नौ बजे पावली खास स्टेशन पर रोक लिया गया। ट्रेन शाम करीब सवा पांच बजे तक वहीं खड़ी रही। जैसे-जैसे ट्रेन रुकने का समय बढ़ता गया, छात्राओं में बेचैनी बढ़ती चली गई। छात्राओं ने बताया कि स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में कुछ युवकों ने घुसने का प्रयास किया, इससे वे सहम गईं। कोच संख्या एस-7 में सवार छात्राओं ने तो कोच की खिड़की तक बंद कर ली।

कोच में कैद छात्राएं सहेलियों के फोन से अभिभावकों से संपर्क में रहीं। दोपहर में सूचना मिलने पर कुछ अभिभावक तो बेटियों को सकौती पहुंचकर ले आये, लेकिन अधिकांश छात्राएं कोच में ही कैद रही। शाम करीब साढ़े पांच बजे किसान आंदोलन खत्म होने और रेल मार्ग ठीक होने की रिपोर्ट के बाद ही शालीमार एक्सप्रेस को सकौती स्टेशन से दिल्ली के लिए रवाना किया जा सका।  आरपीएफ कंपनी कंमाडर आरके यादव को सोफिया गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं के ट्रेन में होने की जानकारी मिली तो उन्होंने सुरक्षा के लिए आरपीएफ फोर्स को सकौती स्टेशन पर भेजकर जिन चार कोच में छात्राएं सवार थी, उनकी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता कराई। ताकि कोच में छात्राओं के साथ किसी तरह घटना न हो सके। रेलवे पुलिस के साथ अभिभावकों ने उस समय राहत की सांस ली, जब ट्रेन सिटी स्टेशन पहुंची और छात्राएं सुरक्षित उतरीं।

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